RAS प्रश्न
नाथद्वारा की 'पिछवाई' चित्रकला किन मौसमी त्योहारों से भी जुड़ी है?
सही उत्तर: (C) सभी मौसम (शरद, वसंत, वर्षा आदि)।
नाथद्वारा की पिछवाई चित्रकला श्रीनाथजी को वर्ष भर के अलग-अलग मौसमों और त्योहारों, जैसे शरद पूर्णिमा, जन्माष्टमी, दिवाली और होली, के अनुरूप दिखाने से जुड़ी है।
व्याख्या
नाथद्वारा की पिछवाई केवल किसी एक त्योहार की चित्र-परंपरा नहीं है। इनमें श्रीनाथजी को अलग-अलग मौसमों और त्योहारों के भावों में दिखाया जाता है। राजस्थान सरकार के राजसमंद जिला उद्योग केंद्र के स्रोत में भी पिछवाई को नाथद्वारा की कपड़े पर बनी चित्रशैली बताया गया है, जिसमें श्रीकृष्ण के जीवन की कथाएँ और श्रीनाथजी का रूप प्रमुख रहता है। वही स्रोत शरद पूर्णिमा, रास लीला, अन्नकूट या गोवर्धन पूजा, जन्माष्टमी, गोपाष्टमी, नंद महोत्सव, दिवाली और होली जैसे उत्सवों को पिछवाई में बार-बार चित्रित बताता है। इसलिए सही बात यह है कि पिछवाई सभी मौसमों और उनसे जुड़े पर्वों की कल्पना से संबंधित है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) केवल दिवाली कहना सीमित है, क्योंकि स्रोत दिवाली के साथ शरद पूर्णिमा, जन्माष्टमी, होली और अन्य उत्सवों को भी पिछवाई में चित्रित बताता है।
- (B) केवल होली कहना सही नहीं है, क्योंकि पिछवाई में होली के अलावा शरद पूर्णिमा, अन्नकूट, जन्माष्टमी, नंद महोत्सव और दिवाली जैसे प्रसंग भी आते हैं।
- (D) केवल शीतकालीन त्योहार कहना गलत है, क्योंकि स्पष्टीकरण और स्रोत दोनों पिछवाई को वर्ष भर के अलग-अलग मौसमों, त्योहारों और श्रीकृष्ण-जीवन के प्रसंगों से जोड़ते हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान की नाथद्वारा चित्रकला और पुष्टिमार्गीय श्रीनाथजी परंपरा में त्योहार-आधारित चित्र-विषय को परखता है। RAS में ऐसी कला-परंपराएँ इसलिए बार-बार आती हैं क्योंकि वे स्थान, संप्रदाय, देव-रूप और लोक-उत्सव को एक साथ जोड़ती हैं।
