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RAS प्रश्न

राजस्थान की फड़ चित्रकला परंपरा किन लोक देवताओं की गाथाओं को दर्शाती है?

सही उत्तर: (C) पाबूजी और देवनारायण।

राजस्थान की फड़ चित्रकला परंपरा पाबूजी और देवनारायण की जीवन-कथाओं और वीर गाथाओं को लंबे कपड़े के चित्रों में दिखाती है।

  1. (A)

    तेजाजी और हरभूजी

  2. (B)

    रामदेवजी और गोगाजी

  3. (C)

    पाबूजी और देवनारायण

  4. (D)

    मल्लीनाथजी और मेहाजी

व्याख्या

फड़ को राजस्थान की प्राचीन पट-चित्र परंपरा माना जाता है। राजस्थान पर्यटन के अनुसार सामान्य फड़ 15 से 30 फीट लंबा आयताकार कपड़ा होता है, जिस पर दो लोकप्रिय लोक नायकों, पाबूजी और देवनारायण, के जीवन और वीर कर्मों के चित्र बनाए जाते हैं। फड़ चित्रकला लोक देवता पाबूजी और देवनारायण की गाथाओं को दर्शाने वाली परंपरा है। इसलिए विकल्प C सही है। राजस्थान पर्यटन यह भी बताता है कि फड़ शाहपुरा, भीलवाड़ा के पास, जोशी चित्रकारों द्वारा बनाए जाते हैं और इनके विषयों में लोकप्रिय लोक कथाएँ भी आती हैं।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) तेजाजी और हरभूजी का जोड़ा गलत है, क्योंकि राजस्थान पर्यटन फड़ के मुख्य लोक नायकों के रूप में पाबूजी और देवनारायण को नाम से बताता है।
  • (B) रामदेवजी और गोगाजी फड़ चित्रकला की केंद्रीय गाथाओं के रूप में नहीं आते; राजस्थान पर्यटन सीधे पाबूजी और देवनारायण का उल्लेख करता है।
  • (D) मल्लीनाथजी और मेहाजी सही जोड़ा नहीं है, क्योंकि राजस्थान पर्यटन फड़ को पाबूजी और देवनारायण से जोड़ता है।

अवधारणा

राजस्थान की लोक चित्रकला और लोक देवता-परंपरा का संबंध आरएएस के लिए महत्त्वपूर्ण है। ऐसे विषयों में कला-रूप, क्षेत्र और उससे जुड़ी लोक गाथा को साथ समझना पड़ता है।

स्रोत

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