RAS प्रश्न
पाशुपत संप्रदाय किसकी पूजा से संबंधित है:
सही उत्तर: (D) शिव।
पाशुपत संप्रदाय शिव की पूजा से संबंधित शैव संप्रदाय है।
व्याख्या
पाशुपत संप्रदाय का मूल स्वरूप शैव है। एलिफेंटा गुफाओं से जुड़े प्रारंभिक कलचुरी लकुलीश-पाशुपत शैव संप्रदाय के अनुयायी माने जाते हैं, इसलिए पाशुपत को सूर्य, ब्रह्मा या विष्णु-पूजा से नहीं जोड़ा जा सकता। इस संप्रदाय की स्थापना लकुलीश ने की, जिन्हें शिव का 28वां अवतार माना जाता है, और पाशुपत सूत्र इसका सबसे प्राचीन दार्शनिक ग्रंथ है। महाभारत और वायु पुराण में इसके उल्लेख से यह प्राचीन भारतीय धार्मिक परंपराओं में एक स्थापित शैव धारा के रूप में सामने आता है। इसी कारण पाशुपत संप्रदाय का उपास्य देवता शिव है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) सूर्य-पूजा सौर संप्रदाय से जुड़ती है, जबकि पाशुपत संप्रदाय शैव परंपरा और शिव-पूजा से संबंधित है।
- (B) ब्रह्मा-पूजा अत्यंत दुर्लभ मानी गई है और पाशुपत परंपरा लकुलीश तथा शिव-संबंधित शैव धारा से जुड़ी है।
- (C) विष्णु-पूजा वैष्णव परंपरा से संबंधित है, जबकि पाशुपत संप्रदाय का संबंध शैव परंपरा और शिव-पूजा से है।
अवधारणा
प्राचीन भारत के धार्मिक संप्रदायों में शैव, वैष्णव और सौर परंपराओं की अलग-अलग पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में संप्रदाय, ग्रंथ और उपास्य देवता को मिलाकर तथ्यात्मक समझ जांची जाती है।
