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RAS प्रश्न

पल्लव वंश को किस लिपि के विकास का श्रेय दिया जाता है जो बाद में कई दक्षिण-पूर्व एशियाई लिपियों में विकसित हुई?

सही उत्तर: (A) ग्रंथ लिपि।

पल्लव वंश को दक्षिणी ब्राह्मी से ग्रंथ लिपि विकसित करने का श्रेय दिया जाता है। बाद में इस लिपि ने दक्षिण-पूर्व एशिया की कई लेखन प्रणालियों को प्रभावित किया।

  1. (A)

    ग्रंथ लिपि

  2. (B)

    खरोष्ठी लिपि

  3. (C)

    नागरी लिपि

  4. (D)

    ब्राह्मी लिपि

व्याख्या

सही उत्तर ग्रंथ लिपि है। पल्लवों ने इसे दक्षिणी ब्राह्मी से विकसित किया। भारतीय लिपियों पर Britannica का लेख भी बताता है कि ब्राह्मी का दक्षिणी रूप ग्रंथ लिपि में विकसित हुआ। ग्रंथ परंपरा को दक्षिण भारत और श्रीलंका की लेखन प्रणालियों से जोड़ा जाता है। पल्लव काल के सांस्कृतिक संपर्कों से इसका प्रभाव दक्षिण-पूर्व एशिया की ख्मेर, थाई, जावानी और मोन लिपियों तक पहुँचा। Britannica के लेख में ख्मेर और मोन लिपियों तथा इंडोनेशिया की कवी या पुरानी जावानी लिपि को खास तौर पर ग्रंथ परंपरा से जोड़ा गया है। इसलिए प्रश्न सामान्य रूप से भारत की सबसे पुरानी लिपि के बारे में नहीं, बल्कि पल्लवों से जुड़ी और दक्षिणी ब्राह्मी से निकली उस लिपि के बारे में पूछता है जिसका प्रभाव भारत से बाहर भी पड़ा। इसलिए विकल्प A, ग्रंथ लिपि, सही है।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (B) खरोष्ठी लिपि सही नहीं है, क्योंकि Britannica इसे प्राचीन भारत की एक अलग लिपि मानता है और स्पष्ट करता है कि इससे बाद की कोई लेखन प्रणाली विकसित नहीं हुई।
  • (C) नागरी लिपि सही नहीं है, क्योंकि पल्लवों से जुड़ा विकास ग्रंथ लिपि का है, नागरी का नहीं।
  • (D) ब्राह्मी लिपि सही नहीं है, क्योंकि वह पुरानी स्रोत-लिपि है। यहाँ पल्लवों से जुड़ी जिस लिपि के विकास के बारे में पूछा गया है, वह दक्षिणी ब्राह्मी से निकली ग्रंथ लिपि है।

अवधारणा

यह प्रश्न प्राचीन भारतीय लिपियों के प्रसार और दक्षिण-पूर्व एशिया पर उनके सांस्कृतिक प्रभाव की समझ जाँचता है। लिपियों, राजवंशों और सांस्कृतिक संपर्कों के ऐसे संबंध प्राचीन भारत के सामान्य विषयों के रूप में RAS में बार-बार पूछे जाते हैं।

स्रोत

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