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RAS प्रश्न

राजस्थान में चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW) संस्कृति किस काल से जुड़ी है?

सही उत्तर: (B) उत्तर वैदिक काल (1100-500 ई.पू.)।

राजस्थान में चित्रित धूसर मृद्भांड संस्कृति उत्तर वैदिक काल से जुड़ी है।

  1. (A)

    प्रारंभिक वैदिक काल

  2. (B)

    उत्तर वैदिक काल (1100-500 ई.पू.)

  3. (C)

    हड़प्पा काल

  4. (D)

    मौर्य काल

व्याख्या

चित्रित धूसर मृद्भांड संस्कृति को उत्तर वैदिक काल से जोड़ने का आधार उसका काल, क्षेत्र और सामग्री-संस्कृति है। प्रश्न में दी गई अवधि 1100-500 ई.पू. है। ई-ज्ञानकोश में चित्रित धूसर मृद्भांड को उत्तर वैदिक समाज की भौतिक स्थितियों से जोड़ा गया है और इसका व्यापक काल 1000-600 ई.पू. बताया गया है। यह धूसर रंग की मृद्भांड परंपरा थी, जिस पर काले रंग से ज्यामितीय आकृतियां बनाई जाती थीं। इसका फैलाव उत्तरी राजस्थान तक था और नोह राजस्थान का प्रमुख स्थल बताया गया है। इसे नदी किनारे फैली, लोहे का उपयोग करने वाली ग्रामीण संस्कृति भी कहा गया है। इसलिए राजस्थान में इसका संबंध उत्तर वैदिक काल से माना जाता है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) प्रारंभिक वैदिक काल सही नहीं है, क्योंकि चित्रित धूसर मृद्भांड उत्तर वैदिक समाज की भौतिक स्थितियों से जुड़ता है।
  • (C) हड़प्पा काल सही नहीं है, क्योंकि चित्रित धूसर मृद्भांड को हड़प्पा के बाद की और उत्तर वैदिक काल की परंपरा माना गया है।
  • (D) मौर्य काल सही नहीं है, क्योंकि मौर्य काल उत्तरी काली पालिशदार मृद्भांड से जुड़ता है, जबकि चित्रित धूसर मृद्भांड उत्तर वैदिक संदर्भ में आता है।

अवधारणा

यह प्रश्न प्राचीन राजस्थान में मृद्भांड-परंपराओं के आधार पर काल-निर्धारण की समझ जांचता है। RAS में नोह जैसे स्थलों के कारण यह विषय बार-बार आता है, क्योंकि इनसे राजस्थान का उत्तर वैदिक और लौह-उपयोगी चरण जुड़ता है।

स्रोत

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