RAS प्रश्न
नटराज कांस्य (नृत्य करते शिव), चोल कला की उत्कृष्ट कृति, किसे चित्रित करती है?
सही उत्तर: (A) शिव सृष्टि और विनाश का ब्रह्मांडीय नृत्य (आनंद तांडव) करते हुए।
नटराज कांस्य में शिव को सृष्टि और विनाश के ब्रह्मांडीय नृत्य, यानी आनंद तांडव, करते हुए दिखाया गया है।
व्याख्या
चोल नटराज कांस्य में शिव नृत्य के स्वामी के रूप में अग्नि-वलय, यानी प्रभामंडल, के भीतर दिखते हैं। Britannica के वर्णन में यह नटराज रूप शिव का ब्रह्मांडीय नर्तक रूप है: पीछे दाहिने हाथ में डमरू सृष्टि का संकेत देता है, पीछे बाएं हाथ की अग्नि विनाश का, सामने दाहिना हाथ अभय मुद्रा में रक्षा का, और सामने बायां हाथ उठे हुए पैर की ओर संकेत करता है, जिसे मुक्ति से जोड़ा गया है। वे अपस्मार, यानी अज्ञान के प्रतीक, पर नृत्य करते हैं। इसलिए यह मूर्ति किसी सामान्य नृत्य-दृश्य की नहीं, बल्कि शिव की उन शक्तियों की छवि है जिनमें सृष्टि, संरक्षण, विनाश और मुक्ति एक साथ व्यक्त होते हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) बुद्ध के ज्ञानोदय में बुद्ध केंद्र में होते हैं, जबकि नटराज कांस्य का केंद्र शिव का ब्रह्मांडीय नर्तक रूप है।
- (C) विष्णु के अवतारों का विषय विष्णु की अलग-अलग अवतार-कथाओं से जुड़ा है, जबकि यहां डमरू, अग्नि, अभय मुद्रा और उठे पैर वाले शिव नटराज दिखाए गए हैं।
- (D) जैन ध्यान में ध्यानस्थ आकृति प्रमुख होती है, जबकि नटराज में शिव अग्नि-वलय के भीतर अपस्मार पर नृत्य करते हुए दिखते हैं।
अवधारणा
यह प्रश्न प्राचीन-मध्यकालीन भारतीय कला में चोल कांस्य मूर्तिकला और शैव प्रतिमा-विज्ञान की पहचान जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि प्रतीक, मुद्रा और देव-रूप से कला-शैली की सही पहचान करनी होती है।
