RAS प्रश्न
नगरी (माध्यमिका) अभिलेख राजस्थान में किस पूजा पद्धति का सबसे प्रारंभिक संदर्भ है?
सही उत्तर: (A) संकर्षण और वासुदेव की पूजा (भागवत संप्रदाय)।
नगरी, यानी मध्यमिका, के पास मिला घोसुण्डी अभिलेख राजस्थान में संकर्षण और वासुदेव की पूजा, अर्थात प्रारंभिक भागवत-वैष्णव परंपरा, का शुरुआती प्रमाण माना जाता है।
व्याख्या
चित्तौड़गढ़ के पास नगरी, जिसे मध्यमिका भी कहा जाता है, से जुड़ा घोसुण्डी अभिलेख इस प्रश्न की कुंजी है। यह भारत के शुरुआती महत्त्वपूर्ण अभिलेखों में है और इसमें संकर्षण, यानी बलराम, तथा वासुदेव, यानी कृष्ण, की पूजा का उल्लेख मिलता है। ASI जोधपुर मंडल के नगरी विवरण में भी बताया गया है कि पुराना मंदिर संकर्षण और वासुदेव की पूजा के लिए बनाया गया था, उसके भीतर उनकी प्रतिमाएँ रखी मानी जाती हैं और वहाँ नियमित पूजा होती थी। इसलिए यह साक्ष्य सूर्य, बौद्ध या शिव पूजा से नहीं, बल्कि ईसा पूर्व 2वीं शताब्दी के आसपास राजस्थान में भागवत अथवा वैष्णव परंपरा की शुरुआती उपस्थिति से जुड़ता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) सूर्य पूजा का प्रमाण नगरी-घोसुण्डी अभिलेख से नहीं, अलग स्रोतों से जुड़ा माना गया है।
- (C) बौद्ध पूजा का प्रमुख साक्ष्य यहाँ नगरी से नहीं बताया गया है; उसका संबंध बैराठ से जोड़ा गया है।
- (D) शिव पूजा को इस अभिलेख का विषय नहीं बताया गया है, क्योंकि उसका प्रमाण बाद के अभिलेखों से संबंधित माना गया है।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान के प्राचीन इतिहास में अभिलेखीय साक्ष्य और धार्मिक परंपराओं की पहचान को जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं, क्योंकि एक ही स्थल, अभिलेख और पूजा-परंपरा को सही तरह जोड़ना पड़ता है।
