RAS प्रश्न
'मोरचंग' राजस्थान का एक लोक वाद्य है। यह क्या है?
सही उत्तर: (D) जबड़े से बजाया जाने वाला वाद्य।
मोरचंग राजस्थान का एक मुख वाद्य है, जो जबड़ा वीणा की तरह दांतों के पास रखकर उंगली से बजाया जाता है।
व्याख्या
मोरचंग, जिसे मोर्सिंग भी कहा जाता है, राजस्थान का छोटा धातु का लोक वाद्य है। इसे दांतों के सामने रखकर उंगली से आघात दिया जाता है, जिससे कंपन ध्वनि बनती है। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार मोरचंग लोहे का छोटा वाद्य है, जिसे बाएं हाथ के अंगूठे और तर्जनी के बीच पकड़ा जाता है; इसका एक भाग दांतों के बीच स्थिर रहता है और दाहिने हाथ की तर्जनी से जीभ को आगे-पीछे चलाकर ध्वनि निकाली जाती है। वादक का मुंह इसमें अनुनादक का काम करता है। इसलिए यह तार, ढोल या सामान्य पवन वाद्य नहीं, बल्कि मुख से कंपन बढ़ाने वाला जबड़ा वीणा प्रकार का वाद्य है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) मोरचंग में तारों को खींचकर या बजाकर ध्वनि नहीं निकाली जाती; यह लोहे का छोटा मुख से बजाया जाने वाला वाद्य है।
- (B) ढोल में चमड़े की सतह पर प्रहार से ताल बनती है, जबकि मोरचंग में दांतों के पास रखी धातु की जीभ को उंगली से चलाकर कंपन ध्वनि बनती है।
- (C) पवन वाद्य में हवा फूंकना मुख्य क्रिया होती है, जबकि मोरचंग में मुंह अनुनादक की तरह काम करता है और ध्वनि उंगली से धातु की जीभ को चलाने से बनती है।
अवधारणा
राजस्थान के लोक वाद्यों की पहचान में उनके वादन-तरीके की समझ जरूरी होती है। RAS में कला-संस्कृति के ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि वाद्य, समुदाय और क्षेत्रीय लोक परंपराएं सीधे राजस्थान अध्ययन से जुड़ी हैं।
