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RAS प्रश्न

बाड़मेर जिले में तिलवाड़ा से प्राप्त सूक्ष्म पाषाण उपकरण किस काल के स्थल का संकेत देते हैं?

सही उत्तर: (A) मध्य पाषाण काल।

बाड़मेर जिले के तिलवाड़ा से मिले सूक्ष्म पाषाण उपकरणों के कारण यह मध्य पाषाण काल का स्थल माना जाता है।

  1. (A)

    मध्य पाषाण काल

  2. (B)

    लौह युग

  3. (C)

    नव पाषाण काल

  4. (D)

    पुरा पाषाण काल

व्याख्या

तिलवाड़ा का संबंध मध्य पाषाण काल से इसलिए जोड़ा जाता है, क्योंकि यहां सूक्ष्म पाषाण उपकरण मिले हैं। तिलवाड़ा और बागोर राजस्थान के मध्य पाषाण स्थलों में गिने जाते हैं। बाड़मेर जिले की पचपदरा तहसील में तिलवाड़ा की खुदाई से बहुत अच्छे ज्यामितीय सूक्ष्म पाषाण उपकरण तथा कच्चे मृद्भांड मिले। छोटे, सूक्ष्म पाषाण उपकरण मध्य पाषाण संस्कृति की पहचान हैं। तिलवाड़ा पश्चिमी राजस्थान में शिकार-संग्रह से चरवाही जीवन की ओर बदलाव समझने में उपयोगी स्थल है; इसलिए सही काल लौह युग, नव पाषाण या पुरा पाषाण नहीं, बल्कि मध्य पाषाण काल है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) लौह युग में प्रमुख पहचान धातु, खासकर लोहे के उपयोग से बनती है, जबकि तिलवाड़ा में सूक्ष्म पाषाण उपकरण मिले हैं।
  • (C) नव पाषाण काल को घिसे-पॉलिश किए औजारों और खेती से जोड़ा जाता है, जबकि तिलवाड़ा की पहचान सूक्ष्म पाषाण उपकरणों से बनती है।
  • (D) पुरा पाषाण काल के औजार सामान्यतः बड़े पाषाण औजारों से पहचाने जाते हैं, जबकि तिलवाड़ा में छोटे सूक्ष्म पाषाण उपकरण निर्णायक संकेत हैं।

अवधारणा

राजस्थान के प्रागैतिहासिक स्थलों का काल-निर्धारण अक्सर वहां मिले उपकरणों के आधार पर किया जाता है। RAS में तिलवाड़ा, बागोर जैसे स्थल बार-बार आते हैं, क्योंकि उनसे राजस्थान में जीवन-यापन के शुरुआती बदलाव समझाए जाते हैं।

स्रोत

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