RAS प्रश्न
MCLR (फंड की सीमांत लागत आधारित उधार दर) शुरू की गई:
सही उत्तर: (D) अप्रैल 2016।
निधियों की सीमांत लागत आधारित उधार दर 1 अप्रैल 2016 से लागू की गई।
व्याख्या
भारतीय रिजर्व बैंक की 17 दिसंबर 2015 की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि निधियों की सीमांत लागत के आधार पर अग्रिमों की ब्याज दर तय करने के अंतिम दिशानिर्देश 1 अप्रैल 2016 से प्रभावी होंगे। इसी व्यवस्था में 1 अप्रैल 2016 से स्वीकृत रुपये के ऋण और नवीनीकृत ऋण-सीमाएं एमसीएलआर के संदर्भ में तय होनी थीं। एमसीएलआर अवधि-संबद्ध आंतरिक मानक है, इसलिए ऋण की अवधि दर-निर्धारण में महत्व रखती है। इसी ढांचे ने आधार दर प्रणाली का स्थान लिया। पुराने आधार दर वाले ऋण चुकौती या नवीनीकरण तक जारी रह सकते थे, लेकिन नई व्यवस्था की शुरुआत अप्रैल 2016 से ही मानी जाती है। अक्टूबर 2019 अलग चरण था, जब नए खुदरा ऋणों के लिए बाहरी मानक से जुड़ी दरें अनिवार्य की गईं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) अप्रैल 2015 गलत है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक की प्रेस विज्ञप्ति अंतिम दिशानिर्देशों की प्रभावी तारीख 1 अप्रैल 2016 बताती है।
- (B) अक्टूबर 2019 एमसीएलआर की शुरुआत नहीं थी; वह नए खुदरा ऋणों के लिए बाहरी मानक से जुड़ी दरों का चरण था।
- (C) अप्रैल 2014 गलत है, क्योंकि एमसीएलआर उससे बाद में 1 अप्रैल 2016 से लागू हुआ।
अवधारणा
यह प्रश्न मौद्रिक नीति के प्रसारण और बैंक उधार दरों के मानक की समझ जांचता है। RAS में यह इसलिए दोहराया जाता है क्योंकि आधार दर, एमसीएलआर और बाहरी मानक जैसे बदलाव बैंकिंग व्यवस्था की बुनियादी अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।
