RAS प्रश्न
राजस्थान की 'मांड' गायन शैली किस शास्त्रीय रूप के समान है?
सही उत्तर: (C) ठुमरी और गज़ल।
राजस्थान की मांड गायन शैली ठुमरी और गज़ल के समान मानी जाती है।
व्याख्या
मांड राजस्थान की अर्ध-शास्त्रीय गायन शैली है और इसे ठुमरी तथा गज़ल के समान माना जाता है। सही पहचान ठुमरी/गज़ल है, क्योंकि मांड का स्वरूप केवल सामान्य लोक-गायन नहीं, बल्कि शास्त्रीयता और भाव-प्रधान गायन से जुड़ा हुआ है। इसकी उत्पत्ति जोधपुर और जैसलमेर के शाही दरबारों से मानी जाती है। गवरी देवी, जिन्हें मांड की रानी कहा गया है, और अल्ला जिलाई बाई जैसे गायकों ने इस शैली को लोकप्रिय बनाया। परीक्षा में मांड राजस्थान की कला-संस्कृति के साथ-साथ अर्ध-शास्त्रीय गायन-परंपरा के रूप में महत्वपूर्ण है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) ख्याल अलग शास्त्रीय रूप है, जबकि मांड की समानता ठुमरी/गज़ल से है।
- (B) ध्रुपद मांड से भिन्न रूप है; मांड की निकटता ठुमरी/गज़ल से जुड़ती है।
- (D) भजन भक्तिपरक गायन है, जबकि मांड अर्ध-शास्त्रीय शैली के रूप में ठुमरी/गज़ल के समान है।
अवधारणा
राजस्थान की लोक और अर्ध-शास्त्रीय संगीत परंपराओं में मांड की पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में मांड जैसे विषय बार-बार आते हैं क्योंकि वे राजस्थान की दरबारी संस्कृति, लोक-संगीत और प्रसिद्ध कलाकारों को जोड़ते हैं।
