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RAS प्रश्न

आरबीआई ने दीर्घकालिक रेपो परिचालन किस उद्देश्य से शुरू किया?

सही उत्तर: (C) उचित लागत पर स्थायी तरलता प्रदान करना।

आरबीआई ने दीर्घकालिक रेपो परिचालन बैंकों को रेपो दर पर उचित लागत वाली स्थायी तरलता देने और कर्ज प्रवाह को सहारा देने के लिए शुरू किया।

  1. (A)

    विदेशी मुद्रा बाजार का विनियमन

  2. (B)

    मुद्रास्फीति नियंत्रण

  3. (C)

    उचित लागत पर स्थायी तरलता प्रदान करना

  4. (D)

    बैंक जमा बढ़ाना

व्याख्या

दीर्घकालिक रेपो परिचालन का केंद्र बिंदु बैंकों को सस्ता और लंबे समय तक उपलब्ध धन देना था, न कि विदेशी मुद्रा या जमा बढ़ाने का कोई अलग कार्यक्रम। आरबीआई की अप्रैल 2020 मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार फरवरी-मार्च 2020 में 5 LTRO किए गए: 1 एक-वर्षीय और 4 तीन-वर्षीय अवधि के। ये सभी निश्चित रेपो दर पर हुए और इनसे प्रणाली में 1.25 लाख करोड़ रुपये की स्थायी तरलता आई, साथ में 75,000 करोड़ रुपये और पाइपलाइन में थे। रिपोर्ट साफ कहती है कि LTRO ने बैंकों को बाजार दरों की तुलना में उचित लागत पर स्थायी तरलता दी। COVID-19 दबाव के समय लक्षित दीर्घकालिक रेपो परिचालन ने कॉरपोरेट बॉन्ड, कमर्शियल पेपर और डिबेंचर जैसे साधनों में धन लगाने की शर्त भी जोड़ी।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) विदेशी मुद्रा बाजार के विनियमन के लिए नहीं, क्योंकि स्रोत LTRO को बैंकों की लागत, तरलता और कर्ज प्रवाह से जोड़ता है, विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप से नहीं।
  • (B) मुद्रास्फीति नियंत्रण इसका सीधा उद्देश्य नहीं था, क्योंकि LTRO प्रणाली में स्थायी तरलता डालता है; यह नकदी घटाने वाला उपाय नहीं है।
  • (D) बैंक जमा बढ़ाना लक्ष्य नहीं था, क्योंकि LTRO में आरबीआई बैंकों को रेपो दर पर निधि देता है; जनता से जमा जुटाने की व्यवस्था इसमें नहीं है।

अवधारणा

यह प्रश्न मौद्रिक नीति के परिचालन उपकरणों, खासकर तरलता प्रबंधन और रेपो व्यवस्था की समझ जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि आरबीआई के उपाय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग और समसामयिक घटनाओं को जोड़ते हैं।

स्रोत

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