RAS प्रश्न
1290 की खिलजी क्रांति का तात्पर्य है:
सही उत्तर: (D) जलालुद्दीन खिलजी द्वारा दास वंश का तख्तापलट।
1290 की खिलजी क्रांति का तात्पर्य जलालुद्दीन फिरोज खिलजी द्वारा दास वंश को हटाकर खिलजी वंश की स्थापना से है।
व्याख्या
खिलजी क्रांति कोई व्यापारिक, धार्मिक या किसान आंदोलन नहीं थी, बल्कि दिल्ली सल्तनत के सत्ता-संतुलन में बदलाव था। जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने दास वंश के अंतिम शासक कैकुबाद को हटाया और 1290 में खिलजी वंश का शासन स्थापित हुआ। इसी कारण इसे ‘क्रांति’ कहा जाता है: इससे तुर्की/इल्बारी कुलीनों के पुराने एकाधिकार को धक्का लगा और सत्ता केवल उसी बंद शासक-वर्ग तक सीमित नहीं रही। जलालुद्दीन को तुर्क, फारसी, अरबी और भारतीय-मुस्लिम अमीरों के एक गुट ने सुल्तान माना। इसलिए सही आशय वंश-परिवर्तन और शासक कुलीनता की संरचना में बदलाव है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) यह व्यापार क्रांति नहीं थी, क्योंकि 1290 की घटना का केंद्र दास वंश का तख्तापलट और खिलजी वंश की स्थापना था।
- (B) यह धार्मिक आंदोलन नहीं था, क्योंकि इसका कारण धर्म-सुधार नहीं, बल्कि तुर्की/इल्बारी कुलीनों के राजनीतिक एकाधिकार का टूटना था।
- (C) यह किसान विद्रोह नहीं था, क्योंकि घटना जलालुद्दीन फिरोज खिलजी के नेतृत्व वाले सत्ता-परिवर्तन और अमीरों की स्वीकृति से जुड़ी थी, किसानों के उठाव से नहीं।
अवधारणा
यह प्रश्न मध्यकालीन भारत में दिल्ली सल्तनत के वंश-परिवर्तन और कुलीन राजनीति की समझ जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि एक ही घटना से शासन, अभिजात वर्ग और सल्तनती सत्ता की प्रकृति समझी जाती है।
