Aspirant Academy

RAS प्रश्न

जैन धर्म और बौद्ध धर्म में मुख्य अंतर है:

सही उत्तर: (A) जैन धर्म आत्मा (जीव) की अवधारणा को मानता है, जबकि प्रारंभिक बौद्ध धर्म स्थायी आत्मा को नहीं मानता (अनात्मा)।

जैन धर्म जीव यानी शाश्वत व्यक्तिगत आत्मा को स्वीकारता है, जबकि प्रारंभिक बौद्ध धर्म स्थायी आत्मा को अनत्ता के आधार पर अस्वीकारता है।

  1. (A)

    जैन धर्म आत्मा (जीव) की अवधारणा को मानता है, जबकि प्रारंभिक बौद्ध धर्म स्थायी आत्मा को नहीं मानता (अनात्मा)

  2. (B)

    केवल भाषा भिन्न

  3. (C)

    कोई अंतर नहीं

  4. (D)

    केवल क्षेत्र भिन्न

व्याख्या

जैन और बौद्ध धर्म का मूल अंतर दर्शन के स्तर पर है, भाषा या क्षेत्र के स्तर पर नहीं। जैन दर्शन में जीव और अजीव का मूल भेद माना गया है; जीव को ऐसी आत्मा माना जाता है जो कर्मों से बंधती है और मुक्ति पा सकती है। इसके उलट प्रारंभिक बौद्ध धर्म आत्मन् को स्थायी सत्ता के रूप में नहीं मानता। Britannica के बौद्ध दर्शन वाले अंश में बुद्ध का अनत्ता सिद्धांत स्थायी आत्मा के निषेध से जुड़ा है और व्यक्ति को 5 स्कंधों के समूह के रूप में समझा जाता है। इसी कारण विकल्प A सही है। साधना के स्तर पर भी जैन तपस्या अधिक कठोर मानी जाती है, जबकि बौद्ध धर्म इंद्रिय-भोग और कठोर आत्म-पीड़ा, दोनों के बीच मध्यम मार्ग रखता है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) भाषा का अंतर मुख्य आधार नहीं है, क्योंकि केंद्रीय फर्क जीव और अनत्ता जैसे दार्शनिक सिद्धांतों से जुड़ा है।
  • (C) दोनों परंपराओं में कोई अंतर नहीं कहना गलत है, क्योंकि जैन धर्म जीव को स्वीकारता है और प्रारंभिक बौद्ध धर्म स्थायी आत्मा को अस्वीकारता है।
  • (D) क्षेत्र का अंतर मुख्य नहीं है, क्योंकि निर्णायक अंतर आत्मा की स्वीकृति और अनत्ता सिद्धांत में है।

अवधारणा

प्राचीन भारत के श्रमण धर्मों में जैन और बौद्ध दर्शन का मूल भेद महत्वपूर्ण है। RAS में यह बार-बार इसलिए आता है क्योंकि समान ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बावजूद दोनों की आत्मा, मुक्ति और साधना संबंधी धारणाएं अलग हैं।

स्रोत

संबंधित प्रश्न