RAS प्रश्न
अटाला मस्जिद में दिखाई देने वाली जौनपुर वास्तुशैली का एक विशेष लक्षण है, जो मुख्यधारा की दिल्ली सल्तनत शैली में नहीं पाया जाता — वह क्या है?
सही उत्तर: (B) एक विशाल पर्देनुमा दीवार (पाइलन), जो केंद्रीय मेहराब को ढकती है और झुका हुआ/बेवेल्ड रूप देती है।
अटाला मस्जिद में जौनपुर शैली की खास पहचान विशाल केंद्रीय पर्दा-दीवार या पाइलन है। इसके ढलानदार किनारे अग्रभाग पर सबसे उभरकर दिखाई देते हैं और केंद्रीय नमाज़-मेहराब को सामने से ढक देते हैं।
व्याख्या
1408 ई. की अटाला मस्जिद जौनपुर की शर्की सल्तनत शैली का प्रमुख उदाहरण है। इसकी खास पहचान नमाज़-कक्ष के सामने बनी विशाल पर्दा-दीवार या पाइलन है; यह मस्जिदों की सामान्य योजना का कोई तत्व मात्र नहीं है। अग्रभाग के बीचोंबीच भव्य मेहराब वाला ऊँचा पाइलन है। इसकी ढलानदार दीवारें केंद्रीय नमाज़-मेहराब से ऊपर उठती हैं और उसे सामने से ढक देती हैं। केंद्रीय पाइलन, भव्य मेहराब और झुकी हुई दीवारों का यह मेल जौनपुर में बची मस्जिदों की खास पहचान है। इसलिए विकल्प B सबसे उपयुक्त है, क्योंकि वह उस विशेषता को बताता है जो जौनपुर की वास्तुकला को दिल्ली सल्तनत की मुख्यधारा और बाद की मुगल शैलियों से अलग रूप देती है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) दोहरे गलियारों वाला पाँच खंडों का नमाज़-कक्ष हिंद-इस्लामी मस्जिद वास्तुकला की एक सामान्य योजना है; यह अटाला मस्जिद में जौनपुर शैली की खास पहचान नहीं है। वह पहचान केंद्रीय पाइलन और उसकी झुकी हुई दीवारों से बनती है।
- (C) वक्राकार बंगला छतें बंगाल की प्रांतीय शैली से जुड़ी हैं और बाद में मुगल मंडपों में भी अपनाई गईं। अटाला मस्जिद की जौनपुर शैली की पहचान उनसे नहीं, बल्कि केंद्रीय पाइलन और पर्दा-दीवार से होती है।
- (D) नीली इज़निक टाइलें उस्मानी तुर्की वास्तुकला से जुड़ी हैं। यहाँ जौनपुर शैली की पहचान चीनी-मिट्टी की टाइलों से नहीं, बल्कि अग्रभाग पर बनी पाइलन जैसी ढलानदार दीवार से होती है।
अवधारणा
यह प्रश्न प्रांतीय हिंद-इस्लामी वास्तुकला की समझ परखता है, खासकर यह कि अलग-अलग सल्तनती शैलियों में मस्जिद के अग्रभाग और नमाज़-कक्ष की बनावट किस तरह बदली। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं, क्योंकि अटाला मस्जिद जैसे स्मारकों से दिल्ली सल्तनत के प्रचलित रूप और क्षेत्रीय शैलियों का अंतर पहचाना जा सकता है।
