RAS प्रश्न
जैन अवधारणा 'स्यादवाद' को और किस नाम से जाना जाता है:
सही उत्तर: (A) सप्तभंगी नय।
जैन दर्शन में स्यादवाद, यानी सशर्त कथन का सिद्धांत, सप्तभंगी नय के नाम से भी जाना जाता है।
व्याख्या
स्यादवाद में किसी कथन को अंतिम और एकमात्र सत्य मानने के बजाय स्यात्, यानी शायद, की शर्त के साथ समझा जाता है। eGyanKosh के अनुसार सत्य या ज्ञान को 7 रूपों में कहा जा सकता है: है, नहीं है, है और नहीं है, कहा नहीं जा सकता, और इनके संयुक्त रूप। इसी कारण इसे सप्तभंगी नय कहा जाता है। नय का अर्थ किसी वस्तु को अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझना है। जैन ज्ञानमीमांसा में यह बात दिखाती है कि ज्ञान सापेक्ष है और किसी वस्तु को समझने के लिए एक ही दृष्टिकोण काफी नहीं होता।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (B) अनेकान्तवाद स्यादवाद से जुड़ा हुआ बहुपक्षीयता का विचार है, लेकिन स्यादवाद के 7 कथन-रूपों वाला नाम सप्तभंगी नय है।
- (C) कर्म सिद्धांत स्यादवाद या सप्तभंगी नय का नाम नहीं है; स्यादवाद को सशर्त कथन और 7 तरीकों से सत्य कहने का सिद्धांत माना जाता है।
- (D) निष्काम कर्म स्यादवाद के स्यात्-आधारित 7 कथन-रूपों से मेल नहीं खाता, इसलिए यह सप्तभंगी नय का विकल्प नहीं बनता।
अवधारणा
प्राचीन भारतीय दर्शन में जैन ज्ञानमीमांसा, खासकर स्यादवाद और सप्तभंगी नय, की बुनियादी समझ जरूरी है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि जैन, बौद्ध और अन्य श्रमण परंपराएं प्राचीन भारत के वैचारिक इतिहास का स्थायी हिस्सा हैं।
