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RAS प्रश्न

'दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC)' किस वर्ष लागू की गई?

सही उत्तर: (D) 2016।

दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) 2016 में अधिनियमित हुई थी, ताकि दिवाला मामलों का समाधान तय समय-सीमा में हो और बिखरे कानून एक संहिता में आएं।

  1. (A)

    2017

  2. (B)

    2014

  3. (C)

    2015

  4. (D)

    2016

व्याख्या

IBC का सही वर्ष 2016 है। इंडिया कोड पर इसी कानून का शीर्षक “दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016” दिया गया है और वहां इसकी तिथि 2016 दर्ज है। इसका उद्देश्य दिवाला और शोधन अक्षमता से जुड़े पुराने बिखरे कानूनों को एक जगह लाकर समाधान की तय समय-सीमा बनाना था। इसी कारण यह केवल वर्ष याद करने वाला तथ्य नहीं है; यह आर्थिक सुधारों में ऋण, उद्यमिता और परिसंपत्तियों के मूल्य से जुड़ी व्यवस्था का हिस्सा है। संहिता ने NCLT को ऐसे मामलों के निपटारे के लिए न्यायिक प्राधिकरण बनाया।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) 2017 गलत है, क्योंकि इंडिया कोड में कुछ धाराओं की बाद की अधिसूचनाएं 2017 में दिखती हैं, पर संहिता का अधिनियमन-वर्ष 2016 ही दर्ज है।
  • (B) 2014 गलत है, क्योंकि इंडिया कोड पर कानून का शीर्षक और दर्ज वर्ष दोनों 2016 बताते हैं, 2014 नहीं।
  • (C) 2015 गलत है, क्योंकि इंडिया कोड में IBC को 2016 की संहिता के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

अवधारणा

यह प्रश्न भारतीय अर्थव्यवस्था में दिवाला समाधान और वित्तीय क्षेत्र के संस्थागत सुधारों की समझ जांचता है। RAS में ऐसे कानून इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि वे ऋण, कारोबार और न्यायिक-नियामकीय ढांचे से सीधे जुड़े होते हैं।

स्रोत

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