RAS प्रश्न
इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) मामला किस नाम से जाना जाता है:
सही उत्तर: (B) मंडल आयोग मामला।
इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) मामला मंडल आयोग मामला के नाम से जाना जाता है।
व्याख्या
इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) को मंडल आयोग मामला कहा जाता है, क्योंकि इसी मामले में केंद्र सरकार के उस आरक्षण फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय ने विचार किया जो मंडल आयोग की सिफारिशों से जुड़ा था। सर्वोच्च न्यायालय ने 27% ओबीसी आरक्षण को बरकरार रखा, आरक्षण की सामान्य ऊपरी सीमा 50% तय की, क्रीमी लेयर को आरक्षण लाभ से बाहर रखने का सिद्धांत माना, और अनुच्छेद 16(4) के तहत प्रोन्नति में आरक्षण की अनुमति नहीं मानी। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के दस्तावेज़ में भी इंद्रा साहनी मामले को सीधे मंडल केस कहा गया है और 27% आरक्षण, क्रीमी लेयर, प्रोन्नति तथा 50% सीमा से जुड़े बिंदु इसी संदर्भ में रखे गए हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) आधार मामला इस प्रश्न के लिए सही नाम नहीं है, क्योंकि इंद्रा साहनी (1992) को मंडल आयोग मामला बताया गया है, आधार मामला नहीं।
- (C) निजता मामला विकल्प इंद्रा साहनी (1992) की पहचान से मेल नहीं खाता, क्योंकि यह मामला मंडल आयोग आरक्षण विवाद से जुड़ा है।
- (D) मूल संरचना मामला सही नहीं है, क्योंकि यहाँ पूछा गया मामला अनुच्छेद 16(4), ओबीसी आरक्षण, क्रीमी लेयर और 50% सीमा से जुड़े मंडल आयोग मामले के रूप में दर्ज है।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय संविधान में समान अवसर, आरक्षण नीति और अनुच्छेद 16(4) की न्यायिक व्याख्या को परखता है। RAS में यह बार-बार आता है, क्योंकि आरक्षण, क्रीमी लेयर और न्यायपालिका की भूमिका भारतीय राजव्यवस्था के स्थायी परीक्षा-बिंदु हैं।
