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RAS प्रश्न

अर्थशास्त्र में 'असंभव त्रिमूर्ति' (त्रिदोष) का अर्थ है कि कोई देश एक साथ ये तीनों नहीं रख सकता:

सही उत्तर: (D) निश्चित विनिमय दर, पूंजी का मुक्त आवागमन और स्वतंत्र मौद्रिक नीति।

असंभव त्रिमूर्ति के अनुसार कोई देश निश्चित विनिमय दर, मुक्त पूंजी आवागमन और स्वतंत्र मौद्रिक नीति को एक साथ बनाए नहीं रख सकता।

  1. (A)

    व्यापार अधिशेष, बजट अधिशेष, और कम ऋण

  2. (B)

    कम मुद्रास्फीति, उच्च विकास, और कम बेरोजगारी

  3. (C)

    उच्च बचत, उच्च निवेश, और उच्च उपभोग

  4. (D)

    निश्चित विनिमय दर, पूंजी का मुक्त आवागमन और स्वतंत्र मौद्रिक नीति

व्याख्या

मुंडेल-फ्लेमिंग की असंभव त्रिमूर्ति खुली अर्थव्यवस्था में नीति-चयन की सीमा बताती है। इसके अनुसार देश तीन लक्ष्यों में से अधिकतम 2 को साथ रख सकता है: निश्चित विनिमय दर, मुक्त पूंजी प्रवाह और स्वतंत्र मौद्रिक नीति। IMF के स्रोत में भी मौद्रिक स्वतंत्रता को इसी त्रिदुविधा के केंद्र में बताया गया है, क्योंकि निश्चित विनिमय दर और मुक्त पूंजी आवागमन के साथ घरेलू उद्देश्यों के अनुसार अपनी मौद्रिक नीति चलाना संभव नहीं रहता। इसलिए विकल्प D सही है। इसी कारण मौद्रिक नीति स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए भारत ने प्रबंधित अस्थायी दर और आंशिक पूंजी नियंत्रण का रास्ता चुना।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) व्यापार अधिशेष, बजट अधिशेष और कम ऋण राजकोषीय-बाह्य स्थिति से जुड़े संकेतक हैं, असंभव त्रिमूर्ति के तीन नीति-विकल्प नहीं।
  • (B) कम मुद्रास्फीति, उच्च विकास और कम बेरोजगारी व्यापक मैक्रो लक्ष्यों का समूह है, जबकि असंभव त्रिमूर्ति विनिमय दर, पूंजी प्रवाह और मौद्रिक नीति स्वतंत्रता पर है।
  • (C) उच्च बचत, उच्च निवेश और उच्च उपभोग राष्ट्रीय आय और खर्च की संरचना से जुड़े हैं, मुंडेल-फ्लेमिंग त्रिदुविधा से नहीं।

अवधारणा

यह प्रश्न खुली अर्थव्यवस्था की मैक्रो नीति और विनिमय दर व्यवस्था की समझ जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि भारत की मौद्रिक नीति, पूंजी नियंत्रण और विनिमय दर प्रबंधन को इसी ढांचे से समझाया जाता है।

स्रोत

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