RAS प्रश्न
आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007) मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि:
सही उत्तर: (D) 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में रखे गए कानूनों को मूल संरचना के उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी जा सकती है।
आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य (2007) में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में रखे गए कानून मूल संरचना के उल्लंघन के आधार पर न्यायिक समीक्षा में परखे जा सकते हैं।
व्याख्या
इस मामले में 9 न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से नौवीं अनुसूची की प्रतिरक्षा को पूर्ण नहीं माना। 24 अप्रैल 1973 को केशवानंद निर्णय में मूल संरचना सिद्धांत स्थापित हुआ था; इसलिए उसके बाद नौवीं अनुसूची में डाले गए कानून केवल इस कारण जाँच से बाहर नहीं हो जाते कि वे अनुच्छेद 31-B के संरक्षण में रखे गए हैं। यदि ऐसा कानून संविधान की मूल संरचना को नष्ट या क्षति पहुँचाता है, खासकर अनुच्छेद 14, 19 और 21 के अंतर्गत मूल अधिकारों के मूल तत्वों को प्रभावित करता है, तो न्यायालय उसकी वैधता जाँच सकता है। इसलिए इस फैसले का महत्व न्यायिक समीक्षा को बचाने और नौवीं अनुसूची की सीमा तय करने में है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) 1ले संशोधन ने नौवीं अनुसूची जोड़ी थी, पर कोएल्हो का नियम यह नहीं है कि केवल वही संशोधन कानूनों को उसमें रख सकता है।
- (B) कोएल्हो में 24 अप्रैल 1973 के बाद नौवीं अनुसूची में रखे कानून मूल संरचना के आधार पर जाँचे जा सकते हैं, इसलिए सभी कानून पूर्ण प्रतिरक्षा में नहीं हैं।
- (C) निर्णय ने नौवीं अनुसूची को समाप्त करने की बात नहीं कही, बल्कि उसके संरक्षण को मूल संरचना और न्यायिक समीक्षा की कसौटी के अधीन रखा।
अवधारणा
मूल संरचना सिद्धांत, नौवीं अनुसूची और न्यायिक समीक्षा का संबंध RAS के लिए महत्वपूर्ण है। यह विषय इसलिए बार-बार आता है क्योंकि इससे संसद की संशोधन शक्ति और सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक नियंत्रण-भूमिका की सीमा स्पष्ट होती है।
