RAS प्रश्न
कालीबंगन में पाई गई हड़प्पाकालीन मिट्टी की खिलौना गाड़ियाँ किसके ज्ञान का संकेत देती हैं?
सही उत्तर: (C) पहिए की तकनीक।
कालीबंगन में मिली पहियों वाली टेराकोटा की खिलौना गाड़ियों से पता चलता है कि हड़प्पाकालीन लोग पहिये का इस्तेमाल करना जानते थे और यातायात के लिए पहियों वाली गाड़ियाँ चलाते थे।
व्याख्या
कालीबंगन की टेराकोटा की खिलौना गाड़ियाँ पहिये के इस्तेमाल का सीधा प्रमाण हैं। ये पहियों वाली गाड़ियों के छोटे रूप हैं, किसी सामान्य शिल्प या हथियार के प्रमाण नहीं। इनसे पता चलता है कि हड़प्पाकालीन लोग पहिये का इस्तेमाल करना जानते थे और यातायात के लिए पहियों वाली गाड़ियाँ चलाते थे, जिन्हें संभवतः बैल खींचते थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उत्खनन रिपोर्ट में हड़प्पाकालीन टेराकोटा की एक खिलौना गाड़ी का पुनर्निर्मित रूप और कालीबंगन-2 के खुदाई-स्तरों में मिले टेराकोटा गाड़ी के ढाँचे दर्ज हैं। रिपोर्ट में ऐसी चौड़ी सड़कों, बड़े प्रवेशद्वारों और सुरक्षित बनाए गए मकानों के कोनों का भी वर्णन है, जो क्रमशः बैलगाड़ियों के चलने, उन्हें घर के भीतर लाने और वाहनों की टक्कर से बचाव से जुड़े थे। इसलिए खिलौना गाड़ी और बस्ती की बनावट से पहियों वाले परिवहन की पुष्टि होती है, जहाज़ बनाने, धातुकर्म या घुड़सवारी की नहीं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) इन अवशेषों से जहाज़ बनाने का निष्कर्ष नहीं निकलता। मिली वस्तु ज़मीन पर चलने वाली, पहियों वाली टेराकोटा की गाड़ी है; वह नाव या समुद्री उपयोग की कोई वस्तु नहीं है।
- (B) धातुकर्म एक अलग शिल्प है। पहियों वाली टेराकोटा की गाड़ी से धातु पर काम करने के बजाय पहियों से चलने की तकनीक का पता चलता है।
- (D) ये अवशेष उन गाड़ियों से जुड़े हैं जिन्हें संभवतः बैल खींचते थे; इनमें न तो घुड़सवारी दिखाई गई है और न ही घोड़ों का कोई स्पष्ट प्रमाण मिलता है।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान के कालीबंगन से मिले पुरातात्त्विक साक्ष्यों के आधार पर सिंधु घाटी सभ्यता की भौतिक संस्कृति पर केंद्रित है। खिलौना गाड़ियों जैसी छोटी वस्तुओं से परिवहन की तकनीक का पता चलता है और स्थानीय पुरातत्व को व्यापक हड़प्पाई नगरीय जीवन से जोड़ा जा सकता है। RAS में ऐसे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, क्योंकि वस्तुओं से लोगों के जीवन, परिवहन और तकनीक के बारे में निष्कर्ष निकालना राजस्थान इतिहास की तैयारी का बुनियादी कौशल है।
