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RAS प्रश्न

महरौली (दिल्ली) का गुप्तकालीन लौह स्तंभ धातुकर्म कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण है क्योंकि:

सही उत्तर: (B) 1,500 वर्ष से अधिक पुराना होने के बावजूद इसमें जंग नहीं लगी है।

महरौली का गुप्तकालीन लौह स्तंभ 1,500 वर्ष से अधिक पुराना होने पर भी जंग से बचा रहा है, इसलिए उसे प्राचीन भारतीय धातुकर्म कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।

  1. (A)

    यह प्राचीन विश्व की सबसे ऊंची लोहे की संरचना है

  2. (B)

    1,500 वर्ष से अधिक पुराना होने के बावजूद इसमें जंग नहीं लगी है

  3. (C)

    इसे आधुनिक वेल्डिंग तकनीकों का उपयोग करके बनाया गया था

  4. (D)

    इसमें सोने की मिश्र धातु की परत है

व्याख्या

महरौली लौह स्तंभ की विशेषता उसकी ऊंचाई या सजावट नहीं, बल्कि उसकी जंग-प्रतिरोधी प्रकृति है। महरौली लौह स्तंभ चंद्रगुप्त द्वितीय से संबंधित माना जाता है और इसमें फास्फोरस की अधिक मात्रा से सुरक्षात्मक निष्क्रिय परत बनती है, इसलिए यह 1,500 वर्ष से अधिक समय से जंग से बचा है। UNESCO के कुतुब मीनार मूल्यांकन में इसे जंग-रहित स्तंभ और प्राचीन भारतीयों के धातुकर्म कौशल का प्रमाण माना गया है। स्तंभ पर 4वीं सदी का संस्कृत लेख है, जिसमें चंद्र नामक शासक के कार्यों का उल्लेख है, जिसे गुप्त राजा चंद्रगुप्त द्वितीय माना जाता है। इसका सही कारण उसका असाधारण जंग-प्रतिरोध है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) UNESCO के कुतुब मीनार मूल्यांकन में स्तंभ की लंबाई 7.02 मीटर है, पर उसका महत्त्व ऊंचाई के कारण नहीं, जंग-रहित धातुकर्म कौशल के कारण है।
  • (C) स्तंभ गढ़े हुए लोहे के अनेक छोटे भागों को जोड़कर बना है; इसे आधुनिक जोड़ाई तकनीकों से बना बताना काल और तकनीक दोनों को गलत कर देता है।
  • (D) जंग से बचाव का कारण फास्फोरस से बनी सुरक्षात्मक परत है, सोने की मिश्र धातु की कोई परत नहीं।

अवधारणा

प्राचीन भारत के विज्ञान-प्रौद्योगिकी और गुप्तकालीन धातुकर्म उपलब्धियों में महरौली लौह स्तंभ एक प्रमुख उदाहरण है। RAS में स्मारक, राजवंश और तकनीकी उपलब्धि को साथ पढ़ना पड़ता है।

स्रोत

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