RAS प्रश्न
गांधार कला शैली (प्रथम-पंचम शताब्दी ई.) किससे प्रभावित थी?
सही उत्तर: (C) ग्रीको-रोमन कला, जिसमें बुद्ध को पहली बार मानव रूप में चित्रित किया गया।
गांधार कला शैली पर ग्रीको-रोमन कला का प्रभाव था, और इसी प्रभाव में बुद्ध को प्रतीक के बजाय मानव रूप में दिखाने की परंपरा स्पष्ट हुई।
व्याख्या
गांधार कला आधुनिक पाकिस्तान और अफगानिस्तान क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती है और यह कुषाण काल, खासकर कनिष्क के समय, फली-फूली। NCERT के अनुसार कुशाण राजवंश ने गांधार क्षेत्र पर शासन किया और उस काल की मूर्तिकला में यूनानी कला का स्पष्ट प्रभाव दिखता है। पहले बौद्ध परंपरा में बुद्ध को प्रत्यक्ष मानव आकृति में नहीं, बल्कि चक्र जैसे प्रतीकों से दिखाया जाता था; सांची में बुद्ध के प्रथम उपदेश को चक्र से दिखाया गया है। गांधार में वही प्रसंग बुद्ध की मानव आकृति के साथ मिलता है। यूनानी कला के प्रभाव में बुद्ध यूनानी टोगा जैसे लिपटे वस्त्र में दिखते हैं और मानव शरीर के निरूपण पर जोर मिलता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) मिस्री कला गांधार शैली की निर्णायक विशेषता नहीं मानी जाती; यहां यूनानी कला का प्रभाव प्रमुख है।
- (B) मेसोपोटामियन कला को गांधार मूर्तिकला का मुख्य प्रभाव नहीं माना जाता; गांधार पर प्रभाव ग्रीको-रोमन और मध्य एशियाई शैलियों से जुड़ता है।
- (D) चीनी कला सही नहीं है, क्योंकि गांधार में बुद्ध की मानव आकृति और पोशाक को यूनानी कला के प्रभाव से समझा जाता है।
अवधारणा
प्राचीन भारतीय कला में गांधार शैली सांस्कृतिक संमिश्रण और बौद्ध प्रतिमा-विकास का महत्वपूर्ण उदाहरण है। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि गांधार और मथुरा जैसी शैलियां राजनीतिक संरक्षण, विदेशी प्रभाव और धार्मिक प्रतीकों के बदलाव को साथ-साथ दिखाती हैं।
