RAS प्रश्न
बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग में सम्यक आजीविका शामिल है। यह किस श्रेणी में आती है?
सही उत्तर: (A) नैतिक आचरण (शील)।
बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग में सम्यक आजीविका शील, यानी नैतिक आचरण, की श्रेणी में आती है।
व्याख्या
अष्टांगिक मार्ग को 3 समूहों में समझा जाता है: प्रज्ञा, शील और समाधि। पहले 2 अंग, सम्यक दृष्टि और सम्यक संकल्प, प्रज्ञा कहे गए हैं क्योंकि वे चेतना और ज्ञान से जुड़े हैं। तीसरे, चौथे और पांचवें अंग, सम्यक वाक्, सम्यक कर्मांत और सम्यक आजीविका, मिलकर शील कहलाते हैं, क्योंकि वे सही और नैतिक जीवन-व्यवहार से संबंधित हैं। इसी कारण सम्यक आजीविका का स्थान नैतिक आचरण में है। सम्यक आजीविका ऐसे पेशे और जीवन-निर्वाह से जुड़ी है जिसमें क्रूरता और जीवों को हानि न हो; इसलिए यह केवल विचार या ध्यान नहीं, बल्कि आचरण का विषय है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) प्रज्ञा में सम्यक दृष्टि और सम्यक संकल्प आते हैं, इसलिए सम्यक आजीविका को प्रज्ञा में रखना गलत वर्गीकरण है।
- (C) समाधि में सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि आते हैं, जबकि सम्यक आजीविका आचरण से जुड़ा अंग है।
- (D) करुणा बौद्ध धर्म में महत्वपूर्ण भाव हो सकती है, पर अष्टांगिक मार्ग के 3 वर्गों में करुणा अलग श्रेणी के रूप में नहीं दी गई है।
अवधारणा
बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग की आंतरिक संरचना में प्रज्ञा-शील-समाधि वर्गीकरण महत्वपूर्ण है। RAS में बौद्ध दर्शन की सूची याद करने के बजाय अंगों को सही अवधारणा से जोड़ने की क्षमता महत्वपूर्ण रहती है।
