RAS प्रश्न
स्यादवाद (शायद का सिद्धांत) किससे संबंधित है:
सही उत्तर: (A) जैन धर्म।
स्यादवाद, यानी सापेक्ष कथन या ‘शायद’ का सिद्धांत, जैन दर्शन से संबंधित है।
व्याख्या
स्यादवाद जैन दर्शन की ज्ञान और निर्णय से जुड़ी प्रमुख अवधारणा है। यह जैन निर्णय-सिद्धांत किसी वस्तु पर कथन को दृष्टिकोण और उस वस्तु के देखे गए पक्ष के संदर्भ में ही सत्य मानता है। इसलिए जैन परंपरा हर निर्णय को ‘स्यात्’ यानी किसी विशेष अर्थ या दृष्टिकोण से सीमित मानती है, ताकि दूसरे दृष्टिकोणों की संभावना बनी रहे। यही बात इसे अनेकांतवाद से जोड़ती है, क्योंकि वास्तविकता को एक ही पक्ष से पूरा नहीं समझा जा सकता। स्यादवाद में सप्तभंगी, यानी कथन की 7 विधियाँ, इसी सापेक्षता को व्यवस्थित रूप से रखती हैं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (B) आजीविक मत नियति या भाग्यवाद से जुड़ा है, जबकि स्यादवाद जैन दर्शन में निर्णयों की सापेक्षता बताता है।
- (C) चार्वाक भौतिकवादी दर्शन है; स्यादवाद जैसा सापेक्ष कथन-सिद्धांत जैन दर्शन की अवधारणा है।
- (D) बौद्ध धर्म की मुख्य शिक्षाएँ मध्यम मार्ग और प्रतीत्यसमुत्पाद से जुड़ी हैं, जबकि स्यादवाद जैन दर्शन का निर्णय-सिद्धांत है।
अवधारणा
प्राचीन भारत के श्रमण दर्शन में जैन, बौद्ध, आजीविक और चार्वाक परंपराओं के अलग-अलग सिद्धांतों की पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में इन परंपराओं के मूल सिद्धांत बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि इनके नाम मिलते-जुलते लग सकते हैं।
