RAS प्रश्न
'सार और तत्व' सिद्धांत का प्रयोग किस बात का निर्धारण करने में किया जाता है:
सही उत्तर: (D) क्या कोई कानून उसे बनाने वाले विधानमंडल की विधायी क्षमता के दायरे में आता है, भले ही संयोग से वह दूसरी सूची में अतिक्रमण करता हो।
सार और तत्व सिद्धांत यह तय करने के लिए प्रयोग होता है कि कोई कानून उसे बनाने वाले विधानमंडल की विधायी सक्षमता में आता है या नहीं, भले ही वह आकस्मिक रूप से दूसरी सूची के क्षेत्र को छूता हो।
व्याख्या
जब किसी कानून को इस आधार पर चुनौती दी जाती है कि उसे बनाने वाले विधानमंडल के पास उस विषय पर विधायी सक्षमता नहीं थी, तब न्यायालय कानून की बाहरी शक्ल नहीं, उसकी वास्तविक प्रकृति देखता है। सर्वोच्च न्यायालय के स्रोत में यही बात कही गई है कि विधायी सक्षमता की चुनौती सूचियों की प्रविष्टियों के संदर्भ में उठे तो कानून के सार और तत्व की जांच की जाती है। यदि जांच से पता चले कि कानून अपने मूल स्वरूप में उसी विधानमंडल को सौंपे गए विषय पर है, तो वह पूरा कानून वैध रह सकता है। दूसरी सूची के विषय पर केवल आकस्मिक अतिक्रमण अपने-आप उसे अमान्य नहीं बनाता। इसलिए यहां सही बात विधायी सक्षमता का निर्धारण है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) राष्ट्रपति की सहमति का प्रश्न कानून की वास्तविक प्रकृति और सूचियों के बीच विधायी सक्षमता तय करने वाला प्रश्न नहीं है।
- (B) किसी कानून का धन विधेयक होना अलग मुद्दा है; सार और तत्व सिद्धांत तब लगाया जाता है जब विषय-सूचियों और विधानमंडल की सक्षमता पर विवाद हो।
- (C) मूल अधिकारों के उल्लंघन की जांच कानून और अधिकारों के टकराव से जुड़ती है, जबकि यह सिद्धांत कानून के वास्तविक विषय और विधायी क्षेत्र को पहचानता है।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय संघीय ढांचे में विधायी विषयों के बंटवारे और न्यायिक समीक्षा की समझ जांचता है। RAS में यह बार-बार इसलिए आता है क्योंकि संविधान की सूचियां, विधायी सक्षमता और न्यायालय की व्याख्या शासन-व्यवस्था के मूल विषय हैं।
