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RAS प्रश्न

'छद्म विधान का सिद्धांत' का अर्थ है:

सही उत्तर: (D) विधानमंडल जो काम सीधे नहीं कर सकता, वही काम अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं कर सकता। यदि किसी विषय पर उसकी विधायी सक्षमता नहीं है, तो वह दूसरे विषय की आड़ लेकर उस पर कानून नहीं बना सकता।।

छद्म विधान का सिद्धांत यह कहता है कि विधानमंडल जिस काम को सीधे नहीं कर सकता, उसे किसी दूसरे विषय की आड़ लेकर अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं कर सकता।

  1. (A)

    कानून रंगीन छपे होने चाहिए

  2. (B)

    राष्ट्रपति विभिन्न प्रकार के कानूनों को रंगों से अलग-अलग चिह्नित कर सकता है

  3. (C)

    केवल जनसमर्थन वाले कानून वैध हैं

  4. (D)

    विधानमंडल जो काम सीधे नहीं कर सकता, वही काम अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं कर सकता। यदि किसी विषय पर उसकी विधायी सक्षमता नहीं है, तो वह दूसरे विषय की आड़ लेकर उस पर कानून नहीं बना सकता।

व्याख्या

छद्म विधान का असली अर्थ रंग या छपाई से नहीं, विधायी सक्षमता से जुड़ा है। इसका सूत्र है: जो प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जा सकता, वह अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं किया जा सकता। इसलिए अदालत केवल कानून के बाहरी रूप को नहीं देखती; वह उसके सार, प्रभाव और संचालन को देखती है। यदि कोई कानून ऊपर से विधानमंडल की शक्ति के भीतर दिखे, पर असल असर में वह ऐसे विषय में दखल दे जिस पर उस विधानमंडल को कानून बनाने की सक्षमता नहीं है, तो वह संवैधानिक सीमा का अतिक्रमण माना जाता है। इसी कारण यह सिद्धांत विधायी मंशा की साधारण जांच नहीं, बल्कि विधायी सक्षमता पर नियंत्रण है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) यह सिद्धांत कानून की रंगीन छपाई से बिल्कुल जुड़ा नहीं है; इसका संबंध इस बात से है कि विधानमंडल अपनी संवैधानिक सक्षमता की सीमा में रहा या नहीं।
  • (B) राष्ट्रपति द्वारा कानूनों को रंगों से अलग-अलग चिह्नित करने का कोई प्रश्न यहां नहीं उठता; सिद्धांत विधानमंडल के कानून बनाने की शक्ति और उसके अतिक्रमण की जांच करता है।
  • (C) किसी कानून की वैधता केवल जनसमर्थन पर निर्भर नहीं बताई गई है; यहां कसौटी यह है कि कानून सार और प्रभाव में विधायी सक्षमता से बाहर तो नहीं जाता।

अवधारणा

यह प्रश्न संविधान में विधायी सक्षमता और शक्तियों की सीमा का परीक्षण करता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि राज्य और संघ की कानून बनाने की सीमाएं समझे बिना संवैधानिक वैधता वाले प्रश्न हल नहीं होते।

स्रोत

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