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RAS प्रश्न

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (C&AG) और महान्यायवादी (AG) के बीच क्या अंतर है?

सही उत्तर: (A) C&AG की कार्यावधि सुरक्षित है (SC न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है); AG राष्ट्रपति की इच्छा पर पद धारण करता है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी पद-सुरक्षा मिलती है, जबकि महान्यायवादी राष्ट्रपति की इच्छा पर पद धारण करता है।

  1. (A)

    C&AG की कार्यावधि सुरक्षित है (SC न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है); AG राष्ट्रपति की इच्छा पर पद धारण करता है

  2. (B)

    AG को SC न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकता है; C&AG राष्ट्रपति की इच्छा पर पद धारण करता है

  3. (C)

    दोनों को कोई संवैधानिक संरक्षण नहीं है

  4. (D)

    दोनों की कार्यावधि की सुरक्षा समान है

व्याख्या

असली अंतर पद से हटाने की सुरक्षा का है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत महान्यायवादी राष्ट्रपति की इच्छा पर पद धारण करता है; इसलिए उसके लिए कोई निश्चित कार्यकाल या हटाने की अलग संसदीय प्रक्रिया नहीं है। इसके उलट अनुच्छेद 148 के तहत नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को केवल उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। यह प्रक्रिया सिद्ध कदाचार या अक्षमता और दोनों सदनों में विशेष बहुमत से जुड़ी है। इसलिए विकल्प A सही है: C&AG सुरक्षित कार्यकाल वाला संवैधानिक पद है, AG राष्ट्रपति की इच्छा पर पद पर रहता है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) विकल्प B में हटाने की व्यवस्था उलटी है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी सुरक्षा C&AG को मिलती है, AG को नहीं।
  • (C) विकल्प C में दोनों के लिए संवैधानिक संरक्षण न होने की बात है, जबकि C&AG को अनुच्छेद 148 में पद से हटाने की स्पष्ट सुरक्षा दी गई है।
  • (D) दोनों की पद-सुरक्षा समान नहीं है, क्योंकि AG राष्ट्रपति की इच्छा पर पद धारण करता है और C&AG को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी हटाने की सुरक्षा मिलती है।

अवधारणा

संविधान में संवैधानिक पदों की स्वतंत्रता और जवाबदेही के लिए पद-सुरक्षा केंद्रीय तत्व है। RAS में यह विषय बार-बार इसलिए आता है क्योंकि C&AG और AG दोनों केंद्र की शासन-व्यवस्था से जुड़े हैं, लेकिन उनकी पद-सुरक्षा अलग है।

स्रोत

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