RAS प्रश्न
माउंट आबू के दिलवाड़ा मंदिर अपनी उत्कृष्ट कारीगरी के कारण किस कला-रूप में प्रसिद्ध हैं?
सही उत्तर: (D) संगमरमर की नक्काशी।
माउंट आबू के दिलवाड़ा जैन मंदिर सफेद संगमरमर की अत्यंत जटिल और बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं।
व्याख्या
दिलवाड़ा मंदिर किसी सामान्य पत्थर या धातु-कार्य के लिए नहीं, बल्कि सफेद संगमरमर पर की गई सूक्ष्म नक्काशी के लिए जाने जाते हैं। राजस्थान पर्यटन के अनुसार माउंट आबू के दिलवाड़ा जैन मंदिर 5 मंदिर संरचनाओं का समूह हैं और सफेद संगमरमर से तराशे गए हैं। इनके भीतर दरवाजों से लेकर छतों तक जटिल डिजाइन फैले हुए हैं। दिलवाड़ा मंदिरों की प्रसिद्धि संगमरमर नक्काशी से जुड़ी है: सामग्री और उस पर की गई बारीक आंतरिक कारीगरी, दोनों इसकी पहचान बनाते हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) लकड़ी नक्काशी सही नहीं है, क्योंकि दिलवाड़ा मंदिर सफेद संगमरमर से तराशे गए हैं, लकड़ी के काम के लिए प्रसिद्ध नहीं हैं।
- (B) बलुआ पत्थर नक्काशी सही नहीं है, क्योंकि मंदिरों की प्रसिद्ध कारीगरी सफेद संगमरमर पर है, बलुआ पत्थर पर नहीं।
- (C) कांस्य ढलाई सही नहीं है, क्योंकि यहां बात धातु ढलाई की नहीं, संगमरमर में बने जटिल आंतरिक डिजाइनों और नक्काशी की है।
अवधारणा
राजस्थान की जैन मंदिर वास्तुकला में दिलवाड़ा मंदिर शिल्प-परंपरा की महत्वपूर्ण पहचान हैं। RAS में ऐसे तथ्यों में स्थान, सामग्री और कला-विशेष को अलग-अलग पहचानना पड़ता है।
