RAS प्रश्न
माउंट आबू के दिलवाड़ा जैन मंदिर किस काल में बने?
सही उत्तर: (D) चालुक्य-सोलंकी शासकों का काल।
माउंट आबू के दिलवाड़ा जैन मंदिर चालुक्य-सोलंकी शासक काल से जुड़े हैं।
व्याख्या
दिलवाड़ा जैन मंदिरों का काल 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच माना जाता है, इसलिए इन्हें चालुक्य-सोलंकी परंपरा से जोड़कर पढ़ना चाहिए। सबसे पुराने मंदिर विमल शाह ने बनवाए थे, जो गुजरात के सोलंकी राजा भीम 1 के जैन मंत्री थे। इसी क्रम में विमल वसही मंदिर 1031 ई. के आसपास और लूण वसही 1230 ई. में बना। ये मंदिर सफेद संगमरमर और बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं। निर्माण-काल के आधार पर दिल्ली सल्तनत, मुगल या मेवाड़ राजपूत काल नहीं, बल्कि चालुक्य-सोलंकी शासक काल सही ठहरता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) दिल्ली सल्तनत काल गलत है, क्योंकि दिलवाड़ा मंदिरों की मुख्य शुरुआत 11वीं शताब्दी में सोलंकी राजा भीम 1 के समय से जुड़ती है।
- (B) मुगल काल गलत है, क्योंकि विमल वसही और लूण वसही जैसे प्रमुख मंदिर 1031 ई. और 1230 ई. से जुड़े हैं, जो मुगल काल से पहले के हैं।
- (C) मेवाड़ राजपूत काल गलत है, क्योंकि निर्माण-काल का आधार सोलंकी शासक और उनके जैन मंत्रियों से जुड़ा है, मेवाड़ शासकों से नहीं।
अवधारणा
राजस्थान की कला-संस्कृति में जैन मंदिर स्थापत्य और राजवंशीय संरक्षण की पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में मंदिर, काल और संरक्षक को मिलाकर तथ्य पूछा जाता है।
