RAS प्रश्न
स्थानीय मान और शून्य के साथ दशमलव अंक प्रणाली भारत में किस काल में विकसित हुई?
सही उत्तर: (D) गुप्त काल।
स्थानीय मान और शून्य वाली दशमलव अंक प्रणाली भारत में गुप्त काल के दौरान विकसित हुई।
व्याख्या
केवल अंक-चिह्नों का प्रयोग और स्थानीय मान-शून्य वाली पूरी दशमलव पद्धति एक ही बात नहीं हैं। दशमलव स्थानीय-मान अंकन भारतीयों ने विकसित किया और पहले प्रयोग में लाया। आर्यभट इस परंपरा की आरंभिक बड़ी कड़ी माने जाते हैं; आर्यभटीय में दशमलव पैमाने और शून्य से जुड़ा खंड मिलता है। यह विकास गुप्त काल, यानी 4वीं-6वीं शताब्दी ई., में स्पष्ट रूप से दिखता है; आर्यभट ने गणनाओं में स्थानीय मान का प्रयोग किया और ब्रह्मगुप्त ने 7वीं शताब्दी में शून्य को संख्या के रूप में औपचारिक रूप दिया। इसी कारण इस उपलब्धि का काल गुप्त काल माना जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) मौर्य काल में अशोक के अभिलेखों में अंक-चिह्नों का प्रयोग मिलता है, पर स्थानीय मान और शून्य सहित पूरी दशमलव पद्धति का विकास उस काल में नहीं ठहरता।
- (B) मुगल काल इस पद्धति के विकास से नहीं जुड़ता; यह विकास गुप्त काल और उसके गणितज्ञों से जुड़ा है।
- (C) वैदिक साहित्य में बड़े संख्यात्मक नामों और गणना-परंपरा के संकेत मिलते हैं, पर स्थानीय मान और शून्य सहित दशमलव पद्धति का विकास यहां नहीं ठहराया गया है।
अवधारणा
प्राचीन भारत के विज्ञान और गणित में अंक-पद्धति का विकास एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। RAS में सांस्कृतिक इतिहास और ठोस वैज्ञानिक उपलब्धियों का संबंध बार-बार परखा जाता है।
