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Aspirant Academy

RAS प्रश्न

दशमलव संख्या प्रणाली और शून्य की अवधारणा किस काल का योगदान था?

सही उत्तर: (A) गुप्त काल।

दशमलव अंक प्रणाली और शून्य की अवधारणा गुप्त काल की गणितीय उपलब्धियाँ थीं।

  1. (A)

    गुप्त काल

  2. (B)

    वैदिक काल

  3. (C)

    मुगल काल

  4. (D)

    मौर्य काल

व्याख्या

गुप्त काल को सही उत्तर इसलिए माना जाता है क्योंकि इसी दौर में भारत में गणित विशेष रूप से उन्नत था। Britannica Kids के भारत-विवरण में गुप्त काल के अंतर्गत भारतीय गणितज्ञों द्वारा शून्य और दशमलव प्रणाली के प्रयोग का उल्लेख मिलता है। इसी ऐतिहासिक क्रम में भारतीय अंकों 1, 2, 3 आदि को बाद में अरबों ने अपनाया और वे यूरोप में अरबी अंकों के रूप में पहुँचे। आर्यभट ने 476 ईस्वी में गणित और खगोल विज्ञान पर आर्यभटीय लिखी, और ब्रह्मगुप्त ने आगे चलकर शून्य के नियमों को अधिक औपचारिक रूप दिया। इसलिए यह उपलब्धि वैदिक, मौर्य या मुगल काल से नहीं, गुप्त काल से जुड़ती है।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (B) वैदिक काल में गणितीय परंपराएँ थीं, लेकिन औपचारिक शून्य और दशमलव अंक प्रणाली गुप्त काल की उन्नत गणितीय उपलब्धि के रूप में मानी जाती है।
  • (C) मुगल काल बहुत बाद का है, जबकि भारतीय गणितज्ञों द्वारा शून्य और दशमलव प्रणाली के प्रयोग तथा उनके अरबों के माध्यम से प्रसार का ऐतिहासिक संबंध गुप्त काल से जुड़ता है।
  • (D) मौर्य काल गुप्त काल से पहले आता है, इसलिए वह उन गणितीय विकासों का सही काल नहीं है जो गुप्त काल के भारतीय गणित से जुड़े हैं।

अवधारणा

प्राचीन भारत के विज्ञान और गणित में गुप्त काल की उपलब्धियाँ RAS के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि वे कालक्रम, सांस्कृतिक उपलब्धि और भारतीय ज्ञान-परंपरा को एक साथ जोड़ते हैं।

स्रोत

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