RAS प्रश्न
भारतीय संसद में 'शून्य काल' की अवधारणा है:
सही उत्तर: (D) कोई अनौपचारिक व्यवस्था जिसका किसी नियम या प्रक्रिया में उल्लेख नहीं है।
भारतीय संसद में शून्य काल एक अनौपचारिक संसदीय उपाय है, जिसका संविधान या प्रक्रिया नियमों में औपचारिक उल्लेख नहीं है।
व्याख्या
शून्य काल को समझने की कुंजी यह है कि यह लिखित नियम से बनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यवहार में विकसित संसदीय व्यवस्था है। लोक सभा प्रश्नोत्तर के अनुसार, प्रश्नकाल और सदन में कागज रखे जाने के तुरंत बाद, सूचीबद्ध कार्य शुरू होने से पहले का समय लोकप्रिय रूप से शून्य काल कहलाता है। यह लगभग 12 बजे शुरू होता है, इसलिए इसे शून्य काल कहा जाता है। इसी समय सदस्य ऐसे विषय उठाना चाहते हैं जिन्हें वे महत्त्वपूर्ण मानते हैं। लेकिन लोक सभा प्रश्नोत्तर साफ बताता है कि शून्य काल शब्द हमारी संसदीय प्रक्रिया में औपचारिक रूप से मान्य नहीं है और नियमों में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए सही उत्तर अनौपचारिक उपाय वाला विकल्प है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) प्रक्रिया नियमों में उल्लिखित कहना गलत है, क्योंकि लोक सभा प्रश्नोत्तर बताता है कि शून्य काल के बारे में नियमों में कोई प्रावधान नहीं है।
- (B) संविधान में उल्लिखित कहना गलत है, क्योंकि शून्य काल संविधान में दर्ज औपचारिक प्रावधान नहीं है।
- (C) ब्रिटिश संसद से लिया गया कहना गलत है, क्योंकि शून्य काल भारतीय संसदीय नवाचार है।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय संसद की कार्यवाही में लिखित नियमों और संसदीय परंपराओं के अंतर को जांचता है। आरएएस में ऐसे तथ्य बार-बार आते हैं क्योंकि शासन व्यवस्था में औपचारिक प्रावधान और व्यवहारगत संसदीय उपाय अलग-अलग पूछे जाते हैं।
