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RAS प्रश्न

भारत में 'शून्य-आधारित बजट' की अवधारणा सर्वप्रथम किस प्रधानमंत्री के कार्यकाल में लागू की गई?

सही उत्तर: (C) राजीव गाँधी।

भारत में शून्य-आधारित बजट की अवधारणा राजीव गाँधी के कार्यकाल में 1986-87 में शुरू की गई।

  1. (A)

    जवाहरलाल नेहरू

  2. (B)

    मोरारजी देसाई

  3. (C)

    राजीव गाँधी

  4. (D)

    इन्दिरा गाँधी

व्याख्या

शून्य-आधारित बजट-निर्माण में हर बजट मद को हर वर्ष नए सिरे से उचित ठहराना होता है; पिछले वर्ष के आवंटन को अपने-आप आधार नहीं माना जाता। इसी कारण यह वृद्धिशील बजट-निर्माण से अलग है, जहाँ पिछला आवंटन अगली राशि तय करने का आधार बन जाता है। भारत में इसका सही संदर्भ राजीव गाँधी का कार्यकाल है, क्योंकि यह व्यवस्था 1986-87 में शुरू की गई मानी जाती है। केंद्रीय बजट 1987-88 का बजट भाषण राजीव गाँधी, प्रधानमंत्री और मंत्री, के भाषण के रूप में दर्ज है और उसी दौर के 1986-87 बजट संदर्भ से जुड़ता है। इसलिए सही उत्तर व्यक्ति-नाम याद रखने भर का नहीं, बल्कि बजट पद्धति के बदलाव को पहचानने का है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) जवाहरलाल नेहरू के दौर का बजटीय संदर्भ पंचवर्षीय योजनाओं से जुड़ा था, जबकि 1986-87 में शुरू हुई व्यवस्था शून्य-आधारित बजट-निर्माण थी।
  • (B) मोरारजी देसाई का संक्षिप्त कार्यकाल 1986-87 के शून्य-आधारित बजट-निर्माण संदर्भ से मेल नहीं खाता।
  • (D) इन्दिरा गाँधी की सरकार के दौर में शून्य-आधारित बजट-निर्माण लागू करने का संदर्भ नहीं मिलता, जबकि सही संदर्भ राजीव गाँधी का कार्यकाल है।

अवधारणा

सार्वजनिक वित्त में बजट-निर्माण पद्धतियों, खासकर वृद्धिशील बजट-निर्माण और शून्य-आधारित बजट-निर्माण के अंतर को समझना जरूरी है। RAS में भारतीय अर्थव्यवस्था के बजट सुधारों को व्यक्ति, वर्ष और अवधारणा के साथ जोड़कर पूछा जाता है।

स्रोत

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