RAS प्रश्न
भारत में जनहित याचिका की अवधारणा किसने प्रस्तुत की थी?
सही उत्तर: (C) न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर और न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती।
भारत में जनहित याचिका की अवधारणा को न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर और न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती ने प्रमुख रूप से प्रस्तुत किया।
व्याख्या
जनहित याचिका भारत में न्यायिक सक्रियता की उपज मानी जाती है। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर और न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती भारत में इस अवधारणा को प्रस्तुत करने वाले शुरुआती न्यायाधीश थे। इसका उद्देश्य उन व्यक्तियों या समूहों के अधिकारों के प्रवर्तन के लिए अदालत तक रास्ता खोलना था जो साधन, स्थिति या दूसरी बाधाओं के कारण स्वयं न्यायालय नहीं पहुंच पाते। यह विकास 1970 के दशक के अंत और 1980 के दशक की शुरुआत में हुआ; मुंबई कामगार सभा बनाम अब्दुलभाई फैजुल्लाभाई (1976) और हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य (1979) को इस क्रम में महत्वपूर्ण माना जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) डॉ. बी.आर. अम्बेडकर संविधान-निर्माण से जुड़े थे, जबकि जनहित याचिका की अवधारणा बाद में न्यायिक सक्रियता के दौर में विकसित हुई।
- (B) न्यायमूर्ति रंजन गोगोई बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे; जनहित याचिका की शुरुआत कृष्ण अय्यर और भगवती से जुड़ी है।
- (D) न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ भी बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश रहे, इसलिए भारत में जनहित याचिका की मूल प्रस्तुति उनसे संबंधित नहीं है।
अवधारणा
भारतीय संविधान और शासन में न्यायिक सक्रियता तथा न्याय तक पहुंच की अवधारणा महत्वपूर्ण है। RAS में यह विषय बार-बार इसलिए आता है क्योंकि जनहित याचिका मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन और सामाजिक न्याय से सीधे जुड़ी है।
