RAS प्रश्न
विधायकों की अयोग्यता में ‘लाभ का पद’ की अवधारणा किस प्रावधान में आती है?
सही उत्तर: (D) अनुच्छेद 102 (संसद) और 191 (राज्य विधानमंडल)।
विधायकों और सांसदों की अयोग्यता में ‘लाभ का पद’ का आधार संसद के लिए अनुच्छेद 102(1)(a) और राज्य विधानमंडलों के लिए अनुच्छेद 191(1)(a) में आता है।
व्याख्या
भारतीय संविधान में सदस्यता की अयोग्यता के आधार अलग-अलग स्तरों पर रखे गए हैं। संसद के किसी भी सदन के सदस्य के लिए अनुच्छेद 102(1)(a) कहता है कि यदि व्यक्ति भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद रखता है, तो वह अयोग्य होगा, जब तक संसद ने उस पद को कानून से अयोग्यता से बाहर न किया हो। राज्य विधान सभा या विधान परिषद के लिए यही नियम अनुच्छेद 191(1)(a) में है, जहां राज्य विधानमंडल कानून से छूट दे सकता है। संविधान ‘लाभ का पद’ को परिभाषित नहीं करता; इसलिए व्यवहार में नियुक्ति, हटाने की शक्ति, पारिश्रमिक और सरकारी कार्य जैसे परीक्षण देखे जाते हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) दसवीं अनुसूची दल-बदल से जुड़ी अयोग्यता का क्षेत्र है, जबकि यहां पूछा गया आधार ‘लाभ का पद’ है।
- (B) अनुच्छेद 75 केवल मंत्रिपरिषद से संबंधित है; ‘लाभ का पद’ के आधार पर सदस्यता की अयोग्यता अनुच्छेद 102 और 191 में दी गई है।
- (C) अनुच्छेद 368 संविधान संशोधन की प्रक्रिया से संबंधित है, सदस्यता की अयोग्यता या लाभ के पद से नहीं।
अवधारणा
संवैधानिक पदों और विधायिका की सदस्यता-अयोग्यता में ‘लाभ का पद’ एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि इसमें संसद और राज्य विधानमंडल के समान लेकिन अलग प्रावधानों को पहचानना पड़ता है।
