RAS प्रश्न
भारत में 'न्यायिक समीक्षा' की अवधारणा किस अनुच्छेद पर आधारित है?
सही उत्तर: (B) अनुच्छेद 13।
भारत में न्यायिक समीक्षा की मूल संवैधानिक नींव अनुच्छेद 13 है, क्योंकि यह मौलिक अधिकारों से असंगत विधियों को उस असंगति की सीमा तक शून्य घोषित करता है।
व्याख्या
अनुच्छेद 13 न्यायिक समीक्षा का प्राथमिक आधार इसलिए माना जाता है क्योंकि संविधान के भाग III, यानी मौलिक अधिकारों, से असंगत कोई भी लागू विधि उस असंगति की सीमा तक शून्य होती है। इसी अनुच्छेद में राज्य को ऐसी विधि बनाने से भी रोका गया है जो इस भाग से मिले अधिकारों को छीनती या कम करती हो; ऐसी विधि भी उल्लंघन की सीमा तक शून्य होती है। इसलिए न्यायालय जब किसी विधि को मौलिक अधिकारों की कसौटी पर परखता है, तो उसका मूल आधार अनुच्छेद 13 का यही शून्यता-नियम है। अनुच्छेद 32 और 226 रिटों के माध्यम से उपचार देते हैं, पर न्यायिक समीक्षा की मूल संवैधानिक अवधारणा का आधार अनुच्छेद 13 है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) अनुच्छेद 136 उच्चतम न्यायालय को विशेष अनुमति से अपील सुनने की शक्ति देता है; यह मौलिक अधिकारों से असंगत विधि को शून्य करने वाला आधार नहीं है।
- (C) अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति देता है, इसलिए यह उपचार का रास्ता है, न्यायिक समीक्षा का प्राथमिक शून्यता-आधार नहीं।
- (D) अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उच्चतम न्यायालय जाने और रिट पाने का अधिकार देता है, पर असंगत विधि को शून्य बताने का नियम अनुच्छेद 13 में है।
अवधारणा
मौलिक अधिकारों, विधियों की वैधता और संवैधानिक उपचारों के बीच अंतर समझना जरूरी है। RAS में ऐसे अनुच्छेद-आधारित तथ्य इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि सही उत्तर अक्सर शक्ति, आधार और उपचार के सूक्ष्म अंतर पर निर्भर करता है।
