RAS प्रश्न
दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य में 'जज़िया' की अवधारणा थी:
सही उत्तर: (B) गैर-मुस्लिम प्रजा पर लगाया गया कर।
दिल्ली सल्तनत और मुगल शासन में जज़िया गैर-मुस्लिम प्रजा पर लगाया जाने वाला कर था।
व्याख्या
जज़िया गैर-मुस्लिम प्रजा पर लगने वाला कर था। भारत में इसे 8वीं शताब्दी में मुहम्मद बिन कासिम ने लागू किया और सल्तनत काल में यह चलता रहा। ईज्ञानकोश की इकाई के अनुसार जज़िया गैर-मुसलमानों पर लगाया जाता था; इसके बदले उन्हें जीवन और संपत्ति की सुरक्षा तथा सैन्य सेवा से छूट मानी जाती थी। इसी कारण यह व्यापार, सेना या कृषि-भूमि का कर नहीं था। अकबर ने 1564 में इसे समाप्त किया, जबकि औरंगज़ेब ने 1679 में फिर लागू किया। इसलिए जज़िया की सही अवधारणा गैर-मुस्लिम प्रजा पर कर की है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) व्यापार कर कहना गलत है, क्योंकि जज़िया व्यापारिक लेन-देन पर नहीं बल्कि गैर-मुस्लिम प्रजा पर लगाया गया कर था।
- (C) यह मुसलमानों पर सैन्य सेवा कर नहीं था; जज़िया देने वालों को सैन्य सेवा से छूट मानी जाती थी।
- (D) कृषि भूमि पर कर खराज से जुड़ा था, जबकि जज़िया गैर-मुस्लिम व्यक्तियों या प्रजा पर लगने वाला अलग कर था।
अवधारणा
मध्यकालीन भारत की राजस्व व्यवस्था और धार्मिक-राजनीतिक नीति में जज़िया जैसे करों की भूमिका महत्वपूर्ण थी। RAS में ऐसे कर बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि वे सल्तनत और मुगल प्रशासन के सामाजिक प्रभाव को सीधे दिखाते हैं।
