RAS प्रश्न
'प्रतीत्यसमुत्पाद' (आश्रित उत्पत्ति) की अवधारणा किसकी केंद्रीय शिक्षा है?
सही उत्तर: (D) बौद्ध धर्म।
प्रतीत्यसमुत्पाद, यानी आश्रित उत्पत्ति, बौद्ध धर्म की केंद्रीय शिक्षा है, जिसमें घटनाओं को परिस्थितियों पर निर्भर होकर उत्पन्न और समाप्त माना जाता है।
व्याख्या
प्रतीत्यसमुत्पाद बुद्ध का सिद्धांत है कि कोई घटना अपने-आप, स्वतंत्र रूप से नहीं उठती; वह कारणों और परिस्थितियों पर निर्भर होकर उत्पन्न होती है। Britannica भी इसे बौद्ध धर्म की मूल अवधारणा बताता है, जो दुःख के कारणों और पुनर्जन्म, बुढ़ापे तथा मृत्यु तक ले जाने वाली घटनाओं की श्रृंखला समझाती है। यह श्रृंखला सामान्यतः 12 निदानों में बताई जाती है। जब कारण और परिस्थितियाँ बनी रहती हैं तो जन्म, दुःख और पुनर्जन्म का चक्र चलता है; जब वे समाप्त होती हैं तो उससे जुड़ी घटना भी समाप्त होती है। इसी समझ को निर्वाण की दिशा का आधार माना गया है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) सांख्य दर्शन का केंद्र पुरुष और प्रकृति का संबंध है, इसलिए प्रतीत्यसमुत्पाद जैसी कारण-परिस्थिति आधारित बौद्ध शिक्षा उससे नहीं जुड़ती।
- (B) आजीविक मत नियति यानी निश्चिततावाद पर आधारित माना गया है, जबकि प्रतीत्यसमुत्पाद कारणों और परिस्थितियों पर निर्भर उत्पत्ति की बात करता है।
- (C) जैन धर्म की केंद्रीय पहचान अनेकांतवाद से जुड़ी है, इसलिए 12 निदानों वाली आश्रित उत्पत्ति की यह शिक्षा जैन धर्म की मुख्य शिक्षा नहीं है।
अवधारणा
यह प्रश्न प्राचीन भारतीय धर्म-दर्शन में श्रमण परंपराओं और बौद्ध सिद्धांतों की पहचान जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि समान काल की दार्शनिक धाराओं के मूल सिद्धांतों में सूक्ष्म अंतर पूछा जाता है।
