RAS प्रश्न
'डी-डॉलराइज़ेशन' की अवधारणा का तात्पर्य है:
सही उत्तर: (C) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और भंडार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना।
डी-डॉलराइजेशन का अर्थ अंतर्राष्ट्रीय व्यापार निपटान और विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना है।
व्याख्या
डी-डॉलराइजेशन में देश व्यापार निपटान और भंडार के लिए USD पर अपनी निर्भरता घटाते हैं। IMF के अनुसार वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी लंबे समय से धीरे-धीरे कम हो रही है और कुछ देश अन्य अंतर्राष्ट्रीय तथा आरक्षित मुद्राओं का उपयोग और धारण बढ़ा सकते हैं। इसलिए यह अवधारणा डॉलर के घरेलू उपयोग को खत्म करने या डॉलर की कीमत घटाने की बात नहीं करती, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था में डॉलर के अत्यधिक प्रभुत्व से क्रमिक दूरी को बताती है। इसी प्रवृत्ति में भारत का रुपया व्यापार निपटान तंत्र, BRICS की साझा मुद्रा चर्चा और द्विपक्षीय मुद्रा समझौते रखे जाते हैं, क्योंकि इनका उद्देश्य लेन-देन और भंडार में डॉलर-निर्भरता कम करना है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) घरेलू उपयोग से डॉलर समाप्त करना इसका केंद्र नहीं है, क्योंकि डी-डॉलराइजेशन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार निपटान और विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर-निर्भरता घटाने से जुड़ा है।
- (B) डॉलर का अवमूल्यन डॉलर की कीमत में गिरावट है, जबकि IMF ने डॉलर के मूल्य से अलग विदेशी मुद्रा भंडार में उसकी हिस्सेदारी घटने की प्रवृत्ति बताई है।
- (D) डॉलर को डिजिटल मुद्रा में बदलना डी-डॉलराइजेशन नहीं है; IMF लेख में डिजिटल वित्तीय तकनीकों का संदर्भ अन्य आरक्षित मुद्राओं को खरीदने, बेचने और रखने की सुविधा से जुड़ा है।
अवधारणा
यह प्रश्न भारतीय अर्थव्यवस्था के बाह्य क्षेत्र, विदेशी मुद्रा भंडार और अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक व्यवस्था की अवधारणा जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि रुपये में व्यापार निपटान और वैश्विक डॉलर प्रभुत्व जैसी समसामयिक आर्थिक प्रवृत्तियां नीति और परीक्षा दोनों से जुड़ती हैं।
