RAS प्रश्न
संविधान के 'मूल ढांचे' की अवधारणा किस वर्ष में प्रतिपादित की गई?
सही उत्तर: (B) 1973।
संविधान के मूल ढांचे की अवधारणा 1973 में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मामले में प्रतिपादित हुई।
व्याख्या
केशवानंद भारती मामला 24 अप्रैल 1973 को भारत के उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला बना। इसमें 13 न्यायाधीशों की पीठ ने 7:6 के बहुमत से मूल ढांचा सिद्धांत प्रतिपादित किया। इस सिद्धांत का सार यह है कि संसद संविधान के किसी भी प्रावधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन संविधान के मूल ढांचे को बदल नहीं सकती। यह फैसला संसद की संशोधन शक्ति पर सीमा तय करता है और मूल ढांचा सिद्धांत को भारतीय संवैधानिक कानून का अहम सिद्धांत बनाता है। इसलिए वर्ष 1973 सही है, क्योंकि इसी साल केशवानंद भारती फैसले ने इस अवधारणा को स्थापित किया।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) 1967 गोलकनाथ मामले से जुड़ा वर्ष है; उस मामले में मूल ढांचा सिद्धांत प्रतिपादित नहीं हुआ था।
- (C) 1980 मिनर्वा मिल्स मामले से जुड़ा वर्ष है, जिसने मूल ढांचा सिद्धांत की पुष्टि की; सिद्धांत का प्रतिपादन 1973 में हो चुका था।
- (D) 1976 42वें संशोधन से जुड़ा वर्ष है; मूल ढांचा सिद्धांत 1973 के केशवानंद भारती फैसले में प्रतिपादित हुआ था।
अवधारणा
संविधान संशोधन शक्ति और न्यायिक समीक्षा की सीमा भारतीय संवैधानिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण विषय हैं। RAS में यह अवधारणा बार-बार आती है, क्योंकि इससे संसद की शक्ति और संविधान की बुनियादी मर्यादा का संबंध स्पष्ट होता है।
