RAS प्रश्न
ब्राह्मणों की चोल ग्राम सभा क्या कहलाती थी:
सही उत्तर: (A) सभा।
चोल प्रशासन में अग्रहार या ब्राह्मण बस्तियों के प्रमुख ब्राह्मण भूस्वामियों की ग्राम सभा को सभा या महासभा कहा जाता था।
व्याख्या
चोल प्रशासन में स्थानीय संस्थाएँ अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक समूहों से जुड़ी थीं। ब्राह्मणों की चोल ग्राम सभा का नाम सभा था। NCERT के अनुसार ब्राह्मणों को भूमि अनुदान मिलने से कावेरी घाटी और दक्षिण भारत के अन्य भागों में ब्राह्मण बस्तियाँ बनीं; ऐसी बस्तियों की देखरेख प्रमुख ब्राह्मण भूस्वामियों की सभा या महासभा करती थी। इसलिए विकल्प A सही है। सभा केवल नाम भर की संस्था नहीं थी: उत्तरमेरूर अभिलेख से पता चलता है कि इसमें सिंचाई, बाग, मंदिर आदि कार्यों के लिए अलग-अलग समितियाँ थीं। इसी व्यवस्था में उर गैर-ब्राह्मण गाँवों से और नगरम व्यापारियों से जुड़ा था, इसलिए वे ब्राह्मण भूस्वामियों की ग्राम सभा नहीं थे।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) नाडु किसी एक ब्राह्मण ग्राम सभा का नाम नहीं था; यह चोल व्यवस्था में गाँवों के बड़े प्रशासनिक समूह के लिए प्रयुक्त इकाई था।
- (C) उर सामान्य, गैर-ब्राह्मण भूस्वामी गाँवों की सभा थी, जबकि सभा ब्राह्मणों की चोल ग्राम सभा थी।
- (D) नगरम व्यापारियों की संस्था थी और नगरों में प्रशासनिक कार्य कर सकती थी, इसलिए यह ब्राह्मण भूस्वामियों की ग्राम सभा नहीं थी।
अवधारणा
चोलकालीन स्थानीय प्रशासन में ग्राम संस्थाओं की पहचान महत्त्वपूर्ण है। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि दक्षिण भारतीय प्रशासन में सभा, उर, नाडु और नगरम जैसे शब्द आपस में मिलते-जुलते लगते हैं।
