RAS प्रश्न
चोल स्थानीय स्वशासन प्रणाली किस स्थान के शिलालेखों से ज्ञात होती है?
सही उत्तर: (A) उत्तिरमेरूर।
चोल स्थानीय स्वशासन प्रणाली की जानकारी तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के उत्तिरमेरूर शिलालेखों से मिलती है।
व्याख्या
चोलकालीन ग्राम-स्तर के स्वशासन का प्रमुख प्रमाण उत्तिरमेरूर शिलालेख हैं। ये शिलालेख तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले से जुड़े हैं और ग्राम परिषदों, यानी सभा और ऊर, के चुनाव, उम्मीदवारों की योग्यताएं तथा कुडवोलै पद्धति से संबंधित हैं, जिसमें मटके से मतदान कराया जाता था। तमिलनाडु ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग के अनुसार तमिलनाडु में स्थानीय स्वशासन की लंबी परंपरा उत्तिरमेरूर शिलालेखों से जुड़ी है। 10वीं और 11वीं शताब्दी में चोल शासन के दौरान ग्राम परिषदें कर लगाती थीं, सामुदायिक जीवन सुधारती थीं और सीमित क्षेत्र में न्याय-प्रशासन करती थीं। चोल स्थानीय स्वशासन के शिलालेखीय स्थल के रूप में उत्तिरमेरूर ही पहचाना जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) महाबलीपुरम का संदर्भ मुख्यतः पल्लव स्थापत्य से जुड़ता है, जबकि चोलकालीन ग्राम स्वशासन का प्रमुख शिलालेखीय प्रमाण उत्तिरमेरूर है।
- (C) कांचीपुरम मुख्यतः पल्लव राजधानी के रूप में जाना जाता है; चोल स्थानीय स्वशासन से जुड़ा विशिष्ट शिलालेखीय स्थल कांचीपुरम जिला नहीं, बल्कि उत्तिरमेरूर है।
- (D) तंजावुर के शिलालेख मंदिर प्रशासन से जुड़े माने जाते हैं, जबकि चोल स्थानीय स्वशासन की ग्राम-परिषद व्यवस्था उत्तिरमेरूर शिलालेखों से जानी जाती है।
अवधारणा
प्राचीन-मध्यकालीन भारतीय इतिहास में दक्षिण भारतीय प्रशासन और स्थानीय स्वशासन की संस्थाएं महत्वपूर्ण विषय हैं। आरएएस में ऐसे स्थल-प्रमाण आधारित सवाल बार-बार आते हैं क्योंकि सही पहचान किसी राजवंश की संस्था को उसके प्रमाणित शिलालेखीय प्रमाण से जोड़ने पर निर्भर करती है।
