RAS प्रश्न
चोल शासक राजेन्द्र I का नौसैनिक अभियान किस दक्षिण-पूर्व एशियाई साम्राज्य तक पहुँचा?
सही उत्तर: (B) श्रीविजय साम्राज्य।
राजेन्द्र चोल प्रथम का 1025 ई. का नौसैनिक अभियान दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय साम्राज्य तक पहुँचा था।
व्याख्या
राजेन्द्र चोल प्रथम ने 1014 से 1044 ई. तक शासन किया। उन्हें अपने पिता राजराज प्रथम से एक मज़बूत राज्य, सक्षम सेना और विकसित व्यापारिक व्यवस्था विरासत में मिली। इसके बाद उन्होंने समुद्री क्षेत्रों में चोल शक्ति का विस्तार किया। लगभग 1025 ई. में उन्होंने दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय साम्राज्य के विरुद्ध एक बड़ा नौसैनिक अभियान चलाया। अभियान का लक्ष्य आज के मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड से जुड़ा क्षेत्र था। इसका एक बड़ा उद्देश्य मलक्का जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार पर प्रभुत्व स्थापित करना भी था। यह अभियान कदारम यानी केदाह जैसे प्रमुख केंद्रों तक पहुँचा। इससे स्पष्ट हुआ कि चोलों की शक्ति केवल भूभाग तक सीमित नहीं थी; वे हिंद महासागर की एक महत्वपूर्ण नौसैनिक शक्ति भी थे। इसलिए श्रीविजय सही उत्तर है, क्योंकि इस अभियान का मुख्य निशाना वही दक्षिण-पूर्व एशियाई साम्राज्य था।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) चम्पा केवल गौण लक्ष्य था; 1025 ई. के नौसैनिक अभियान का मुख्य निशाना श्रीविजय साम्राज्य था।
- (C) मजापहित साम्राज्य दक्षिण-पूर्व एशिया के इतिहास में बहुत बाद में उभरा था, इसलिए वह राजेन्द्र चोल प्रथम के 1025 ई. के अभियान का लक्ष्य नहीं हो सकता था।
- (D) दक्षिण-पूर्व एशिया के व्यापक क्षेत्र से खमेर साम्राज्य के संपर्क थे, लेकिन वह इस नौसैनिक अभियान का मुख्य निशाना नहीं था; मुख्य निशाना श्रीविजय था।
अवधारणा
यह अवधारणा राजेन्द्र चोल प्रथम के समय चोलों के समुद्री विस्तार तथा नौसैनिक शक्ति, हिंद महासागर के व्यापार और दक्षिण-पूर्व एशियाई अभियानों के आपसी संबंध पर केंद्रित है। RAS के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि इससे मध्यकालीन दक्षिण भारत की राजव्यवस्था, प्रशासन और कला को व्यापक एशियाई व्यापारिक संपर्कों तथा हिंद महासागर में भारतीय प्रभाव से जोड़कर समझा जा सकता है।
