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RAS प्रश्न

बौद्ध अवधारणा 'प्रतीत्यसमुत्पाद' का अर्थ है:

सही उत्तर: (C) प्रतीत्य समुत्पाद (आश्रित उत्पत्ति)।

बौद्ध अवधारणा प्रतीत्यसमुत्पाद का अर्थ आश्रित उत्पत्ति है, यानी दुख और जीवन-चक्र को कारणों की जुड़ी हुई श्रृंखला से समझना।

  1. (A)

    अनात्मन

  2. (B)

    दुःख

  3. (C)

    प्रतीत्य समुत्पाद (आश्रित उत्पत्ति)

  4. (D)

    अनित्यता

व्याख्या

प्रतीत्यसमुत्पाद बौद्ध धर्म की मूल अवधारणा है, जिसे आश्रित उत्पत्ति या कारण-श्रृंखला के रूप में समझा जाता है। Britannica के अनुसार यह दुख के कारणों और उन घटनाओं के क्रम को बताती है जो प्राणी को पुनर्जन्म, बुढ़ापे और मृत्यु तक ले जाता है। इसी कारण MCQ में विकल्प C सही है। परंपरागत रूप में इसे 12 निदानों से समझाया जाता है: अविद्या से संस्कार, विज्ञान, नामरूप, षडायतन, स्पर्श, वेदना, तृष्णा, उपादान, भव, जाति और अंत में जरामरण। बात केवल यह नहीं है कि दुख है; बात यह है कि दुख किसी अकेली, स्वतंत्र चीज से नहीं, बल्कि एक कारण से दूसरे कारण के उठने पर पैदा होता है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) अनात्मन बौद्ध विचार में स्थायी आत्मा के निषेध से जुड़ी अवधारणा है; यह प्रतीत्यसमुत्पाद की कारण-श्रृंखला वाला अर्थ नहीं बताती।
  • (B) दुःख बौद्ध दर्शन की केंद्रीय समस्या है, लेकिन प्रतीत्यसमुत्पाद उस दुख के उठने की कारण-श्रृंखला समझाता है, स्वयं 'दुःख' का नाम नहीं है।
  • (D) अनित्यता वस्तुओं और अवस्थाओं के अस्थायी होने का विचार है; प्रतीत्यसमुत्पाद का खास अर्थ आश्रित उत्पत्ति और कारणों की कड़ी है।

अवधारणा

यह प्रश्न प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध दर्शन की मूल शब्दावली की समझ जांचता है। RAS में ऐसे शब्द बार-बार आते हैं, क्योंकि सही उत्तर केवल अनुवाद से नहीं, अवधारणा के अंतर से तय होता है।

स्रोत

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