RAS प्रश्न
भोपा समुदाय मुख्य रूप से क्या भूमिका निभाता है:
सही उत्तर: (A) घूम-घूमकर लोक महाकाव्य सुनाने वाले पुजारी-कलाकार।
भोपा समुदाय मुख्य रूप से वंशानुगत पुजारी-कलाकारों का समुदाय है, जो फड़ लेकर गांव-गांव जाते हैं और लोक देवताओं की गाथाएं सुनाते हैं।
व्याख्या
भोपा की भूमिका केवल पूजा कराने तक सीमित नहीं है। वे वंशानुगत पुजारी-कलाकार हैं, जो फड़ के साथ गांव-गांव जाकर लोक देवताओं की गाथाएं सुनाते हैं। फड़ स्थानीय देवताओं और लोक नायकों की बड़ी कथाओं वाला चित्रित कपड़ा है, और स्थानीय पुजारी यानी भोपा इन कथाओं को संगीत के साथ प्रस्तुत करते हैं। भोपा प्रदर्शन के लिए फड़ को कंधे पर रखकर गांव-गांव ले जाते हैं। इसलिए उनकी प्राथमिक पहचान भ्रमणशील पुजारी-कलाकार की है, न कि स्थिर मंदिर पुजारी या किसी अन्य पेशे की।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) भोपा को केवल मंदिर पुजारी कहना गलत है, क्योंकि वे फड़ लेकर गांव-गांव कथाएं सुनाने वाले पुजारी-कलाकार हैं।
- (C) किसान विकल्प सही नहीं है, क्योंकि भोपा की भूमिका खेती नहीं, बल्कि लोक देवताओं की गाथाओं का फड़ के साथ प्रदर्शन है।
- (D) लोहार विकल्प गलत है, क्योंकि भोपा का संबंध फड़ कथाओं के गायन-प्रदर्शन और स्थानीय देवताओं के पुजारी रूप से है, धातु-काम से नहीं।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान की लोककला, लोकदेवता परंपरा और फड़ प्रदर्शन परंपरा की समझ जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि समुदाय, कला-रूप और धार्मिक-लोक प्रदर्शन को अलग-अलग पहचानना जरूरी होता है।
