RAS प्रश्न
विशिष्टाद्वैत (सविशेष अद्वैत) दर्शन का प्रतिपादन करने वाले भक्ति संत कौन थे?
सही उत्तर: (C) रामानुज।
दक्षिण भारतीय भक्ति संत रामानुज ने विशिष्टाद्वैत अर्थात सविशेष अद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया था।
व्याख्या
रामानुज (1017-1137) दक्षिण भारतीय भक्ति संत और विशिष्टाद्वैत यानी सविशेष अद्वैत के प्रतिपादक थे। इस दर्शन में ईश्वर, आत्मा और पदार्थ को वास्तविक माना गया है, लेकिन आत्मा और पदार्थ ईश्वर पर निर्भर रहते हैं। एनसीईआरटी के अनुसार रामानुज का जन्म 11वीं सदी में तमिलनाडु में हुआ था। वे आलवार संतों से गहरे प्रभावित थे और मानते थे कि विष्णु के प्रति गहरी भक्ति मोक्ष का श्रेष्ठ मार्ग है। विष्णु की कृपा से भक्त उनसे मिलन कर पाता है, फिर भी उस मिलन में उसकी आत्मा की अलग सत्ता बनी रहती है। इसी कारण रामानुज के मत को पूर्ण अद्वैत के बजाय सविशेष अद्वैत माना जाता है। उन्होंने ब्रह्म सूत्रों पर श्री भाष्य लिखा और उनकी परंपरा ने बाद की भक्ति धाराओं को प्रभावित किया।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) शंकराचार्य अद्वैत दर्शन से जुड़े हैं, जो जीवात्मा और परमात्मा की एकता को अंतिम सत्य मानता है। इसलिए वे विशिष्टाद्वैत के प्रतिपादक नहीं हैं।
- (B) वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया था, जो रामानुज के विशिष्टाद्वैत यानी सविशेष अद्वैत से अलग है।
- (D) मध्वाचार्य द्वैत दर्शन से जुड़े हैं, जो ईश्वर और जीव के भेद पर बल देता है। इसलिए वे विशिष्टाद्वैत के प्रतिपादक नहीं हैं।
अवधारणा
मध्यकालीन भक्ति आंदोलन में कई प्रमुख दार्शनिक मत और उनके प्रवर्तक शामिल हैं। RAS में संतों और दार्शनिक मतों के सही मिलान से जुड़े प्रश्न अक्सर धार्मिक सुधार, वेदांत दर्शन और क्षेत्रीय भक्ति परंपराओं के आपसी संबंध की समझ परखते हैं।
