RAS प्रश्न
भक्ति संत रामानुज (11वीं-12वीं शताब्दी) ने प्रतिपादित किया:
सही उत्तर: (A) विशिष्टाद्वैत (सगुण अद्वैत) दर्शन।
भक्ति संत रामानुज ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसमें द्वैत और अद्वैत दोनों का समावेश माना गया।
व्याख्या
रामानुज 11वीं-12वीं शताब्दी के भक्ति संत थे और उन्होंने विशिष्टाद्वैत का प्रतिपादन किया। इसका अर्थ है कि आत्मा वास्तविक और भिन्न है, फिर भी ब्रह्म यानी भगवान विष्णु का अंश है। PIB में प्रधानमंत्री के वक्तव्य में स्पष्ट कहा गया है कि अद्वैत और द्वैत के साथ रामानुजाचार्य का विशिष्टाद्वैत भी है, जो द्वैत-अद्वैत दोनों को समेटता है। इसी वक्तव्य में उन्हें भक्ति मार्ग का संस्थापक भी कहा गया है। रामानुज की मुख्य पहचान भक्ति परंपरा, विष्णु-भक्ति और विशिष्टाद्वैत दर्शन से जुड़ती है; उन्हें केवल अद्वैत या द्वैत के किसी एक छोर पर रखना सही नहीं है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) द्वैत अलग दार्शनिक मत है; रामानुजाचार्य के साथ विशिष्टाद्वैत जुड़ा है, जो द्वैत और अद्वैत दोनों को समेटने वाला मत माना गया है।
- (C) अद्वैत शंकराचार्य से जुड़ा है, जबकि रामानुज ने उसके विपरीत विशिष्टाद्वैत पर बल दिया।
- (D) शून्यवाद रामानुज-भक्ति संदर्भ से मेल नहीं खाता, क्योंकि रामानुज विशिष्टाद्वैत और भक्ति मार्ग से जुड़े हैं।
अवधारणा
मध्यकालीन भक्ति आंदोलन में वैष्णव संतों और उनके दार्शनिक मतों की पहचान महत्वपूर्ण है। RAS में संत, संप्रदाय और दर्शन को मिलाकर पूछे गए छोटे तथ्य इतिहास में जल्दी भ्रम पैदा करते हैं, इसलिए रामानुजाचार्य को विशिष्टाद्वैत और विष्णु-भक्ति से जोड़कर याद रखना चाहिए।
