RAS प्रश्न
भारतीय संविधान का 'मूल संरचना सिद्धांत' किस मामले में प्रतिपादित किया गया था?
सही उत्तर: (C) केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)।
भारतीय संविधान का मूल संरचना सिद्धांत केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में प्रतिपादित किया गया था।
व्याख्या
मामला संविधान संशोधन की सीमा से जुड़ा है। मूल संरचना सिद्धांत सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की पीठ ने केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में प्रतिपादित किया। केशवानंद में 13 न्यायाधीशों की पीठ ने 7-6 बहुमत से कहा कि संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, लेकिन संविधान की मूल संरचना को क्षति नहीं पहुंचा सकती। इसी कारण उत्तर केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य है। यही सिद्धांत संविधान संशोधन पर न्यायिक समीक्षा की केंद्रीय कसौटी बन गया, इसलिए इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक कानून निर्णयों में गिना जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य (1950) सही नहीं है, क्योंकि मूल संरचना सिद्धांत 1973 के केशवानंद निर्णय से जुड़ा है, 1950 के इस मामले से नहीं।
- (B) गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य (1967) सही नहीं है, क्योंकि केशवानंद में 13 न्यायाधीशों की पीठ ने गोलकनाथ को आंशिक रूप से पलटते हुए मूल संरचना की सीमा रखी।
- (D) मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) सही नहीं है, क्योंकि यह 1980 का बाद का निर्णय है, जबकि मूल संरचना सिद्धांत 1973 के केशवानंद भारती मामले में प्रतिपादित माना गया है।
अवधारणा
यह प्रश्न संविधान संशोधन शक्ति और न्यायिक समीक्षा के मूल सिद्धांत को जांचता है। आरएएस में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि संसद की संशोधन शक्ति और संविधान की मूल सीमा भारतीय राजव्यवस्था के स्थायी परीक्षा-बिंदु हैं।
