RAS प्रश्न
1945 में उदयपुर में आयोजित अखिल भारतीय रियासती प्रजा सम्मेलन (AISPC) का सत्र महत्वपूर्ण था क्योंकि:
सही उत्तर: (A) इसमें घोषणा की गई कि रियासतों को भारतीय संघ में शामिल होना चाहिए और उत्तरदायी सरकार स्थापित करनी चाहिए।
1945 के उदयपुर सत्र में अखिल भारतीय रियासती प्रजा सम्मेलन ने रियासतों में पूर्ण उत्तरदायी सरकार और स्वतंत्र भारत की संघीय व्यवस्था का हिस्सा बनने की नीति रखी।
व्याख्या
यह सत्र इसलिए निर्णायक था कि 30 दिसंबर 1945 के उदयपुर अध्यक्षीय भाषण में जवाहरलाल नेहरू ने रियासतों की समस्या को बाकी भारत की आज़ादी से अलग नहीं माना। उदयपुर में सम्मेलन होना ही रियासती जनता के आंदोलन के बढ़ने का प्रमाण था। आगे नीति साफ की गई कि रियासतों में पूर्ण उत्तरदायी सरकार हो और वे आज़ाद भारत के अभिन्न हिस्से रहें; लोकतंत्र, चुनी हुई विधानसभाएँ, मौलिक स्वतंत्रताएँ और स्वतंत्र न्यायपालिका इसके मानक थे। इसी कारण यह सत्र सिर्फ स्थानीय सभा नहीं रहा, बल्कि राजस्थान के प्रजा मंडल आंदोलनों को राजनीतिक दिशा और बढ़ावा देने वाला क्षण बना।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) सत्र की पहचान जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता और नीति-घोषणा से जुड़ी है; माणिक्य लाल वर्मा को सभी प्रजा मंडलों का नेता नियुक्त करने का आधार नहीं मिलता।
- (C) सत्र की बात केवल राजपूताना तक सीमित नहीं थी, क्योंकि रियासतों की समस्या पूरे भारत, संघीय व्यवस्था और स्वतंत्र भारत के ढांचे से जुड़ी थी।
- (D) इस सत्र में सशस्त्र क्रांति का निर्णय नहीं हुआ; इसमें लोकतांत्रिक ढांचे, उत्तरदायी सरकार और राजाओं को बदलती परिस्थितियों में जनता की दिशा में आने की बात थी।
अवधारणा
यह सवाल राजस्थान में प्रजा मंडल आंदोलन और रियासतों के लोकतंत्रीकरण वाले हिस्से को जाँचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि राजस्थान की रियासतों का राष्ट्रीय आंदोलन और भारतीय संघ से संबंध इसी प्रसंग में साफ दिखता है।
